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पटवारी बना तहसीलदार से बड़ा अधिकारी!

पटवारी बना तहसीलदार से बड़ा अधिकारी!
“अनुसूचित जाति वर्ग का होने के कारण मेरी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है और स्थानीय प्रशासन द्वारा लगातार उपेक्षा की जा रही है। न्याय की उम्मीद में मैं अधिकारियों के चक्कर लगाने को मजबूर हूँ।” — फरियादी नन्नूलाल जाटव
तीन-तीन आदेशों के बाद भी नहीं हुआ भूमि सीमांकन, फरियादी न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर
फरियादी ने बताया कि अगर हमारी समस्या का निराकरण नहीं हुआ तो हम उक्त शिकायत को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री जी से भी भेंट कर अपनी समस्या अवगत कारायेंगे
बीनागंज। जिले के चाचोड़ा राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। एक भूमि विवाद मामले में तहसीलदार द्वारा तीन बार सीमांकन के आदेश जारी किए जाने के बावजूद संबंधित पटवारी द्वारा आज तक सीमांकन की कार्रवाई नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। इससे फरियादी और उसके परिवार को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार फरियादी नन्नू लाल पिता हजारी लाल जाटव के स्वामित्व की भूमि ग्राम लहरचा मे स्थित है जिसका सर्वे नंबर 18 , रकवा 0.449 हैक्टर ने अपनी भूमि का सीमांकन कराने के लिए नियमानुसार आवेदन प्रस्तुत किया था। तहसीलदार कार्यालय द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए लगातार तीन बार सीमांकन के आदेश जारी किए गए, लेकिन संबंधित पटवारी रघुवीर सिंह यादव ने आदेशों को अमल में लाने में कोई रुचि नहीं दिखाई। आरोप है कि पटवारी के तानाशाही रवैये और लापरवाही के कारण प्रशासनिक आदेश कागजों तक ही सीमित होकर रह गए हैं।
*अधिकारियों के चक्कर काट रहा फरियादी*
न्याय की उम्मीद में फरियादी ने तहसीलदार से लेकर एसडीएम, कलेक्टर कार्यालय और यहां तक कि अनुसूचित जाति आयोग तक शिकायत दर्ज कराई। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से फरियादी में निराशा और आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि जब वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों का पालन ही नहीं हो रहा, तो आम नागरिक आखिर न्याय की उम्मीद किससे करे।
*प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*
मामले में लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि राजस्व अधिकारियों के आदेशों की इस तरह अनदेखी होती रही तो शासन की मंशा और आम जनता का भरोसा दोनों प्रभावित होंगे।
*जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग*
फरियादी नन्नूलाल जाटव ने मांग की है कि सीमांकन कार्य तत्काल कराया जाए तथा आदेशों की अवहेलना करने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाए। सामाजिक संगठनों ने भी मामले को गंभीर बताते हुए प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है।
*बड़ा सवाल*
*क्या एक पटवारी के सामने तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर के आदेश भी बेअसर हो गए हैं?* यदि ऐसा है तो आम नागरिकों को समय पर न्याय कैसे मिलेगा? अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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