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लगभग 10 में से 9 महिला उद्यमी दोबारा बिजनेस लोन लेने के लिए वापस आती हैं – प्रोगकैप के आंकड़ों से पता चली यह बात

दिल्ली से राहुल कुमार

कई वर्षों से महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को पैसा देने की चर्चाएँ केवल एक ही बात पर टिकी थीं: कि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाओं को औपचारिक ऋण सिस्टम से जोड़ा जाए। अमूमन सफलता इस बात से मापी जाती थी कि कितने नए लोगों ने पहली बार लोन लिया या कुल कितना पैसा बाँटा गया। लेकिन अब इस क्षेत्र में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है।

प्रोगकैप की महिलाओं के लिए चलाई जा रही विशेष पहल ‘प्रोगशक्ति’ के आंकड़ों के अनुसार, बिजनेस के बढ़ने का सबसे बड़ा संकेत अब पहला लोन नहीं रहा; बल्कि दूसरा, तीसरा और चौथा लोन है।

इस कार्यक्रम से जुड़ी लगभग 89% महिला उद्यमियों ने दोबारा लोन लिया है। यह दर्शाता है कि औपचारिक लोन अब उनके लिए केवल एक बार की ज़रूरत नहीं रहा, बल्कि यह उनके बिजनेस को बढ़ाने, रोज़मर्रा के खर्चों को संभालने और विस्तार करने का एक मुख्य हिस्सा बनता जा रहा है।

यह भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव है। बार-बार लोन लेना केवल पैसे मिलने की सुविधा को ही नहीं दिखाता; बल्कि यह साबित करता है कि ये बिजनेस न केवल टिके हुए हैं, बल्कि बढ़ रहे हैं और उनमें इतना भरोसा आ चुका है कि वे आगे बढ़कर और ज़्यादा पूंजी हासिल कर रहे हैं। वहीं बैंक या लोन देने वाली संस्थाओं के लिए भी यह बेहतर ग्राहकों और लोन चुकाने के अच्छे व्यवहार का संकेत है।

यह बदलाव तब और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब इसे एक और बड़े आंकड़े के साथ देखा जाए। इस प्लेटफॉर्म पर जुड़ी महिला उद्यमियों की क्रेडिट लिमिट में समय के साथ 105% की बढ़ोतरी देखी गई है। पहली बार मिलने वाले लोन से अलग, बड़ी क्रेडिट लिमिट आमतौर पर समय पर लोन चुकाने, बिजनेस की बढ़ती ज़रूरतों और मजबूत वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर ही मिलती है। ये दोनों बदलाव मिलकर यह दिखाते हैं कि महिला उद्यमी न केवल बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रही हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर लोन पाने के लिए ज़रूरी भरोसा भी लगातार बना रही हैं।

दिलचस्प बात यह है कि प्रोगशक्ति के ज़रिए लोन पाने वाली महिलाओं में 11% पहली बार लोन लेने वाली हैं। हालाँकि, नए बिजनेस को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था में लाना अब भी महत्वपूर्ण है, लेकिन असली और बड़ी कहानी पहली बार लोन मिलने के बाद की है। यह आंकड़े बताते हैं कि महिला उद्यमी अब बैंक लोन को एक बार मिलने वाले पैसे की तरह नहीं, बल्कि एक लगातार इस्तेमाल होने वाले साधन की तरह देख रही हैं: जिससे वे माल की खरीदारी, बिजनेस का विस्तार, सप्लायर्स का भुगतान और रोज़मर्रा के काम आसानी से चला रही हैं।

क्षेत्रीय रुझान इस बदलाव को और भी मजबूत करते हैं, हालांकि हर क्षेत्र बिजनेस वृद्धि के एक अलग स्तर को दर्शाता है। दिल्ली-एनसीआर औपचारिक ऋण लेने वाली महिला उद्यमियों के लिए सबसे बड़े बाजार के रूप में उभरा है, जहां 262 सक्रिय महिला उद्यमियों ने कुल मिलाकर 588 करोड़ रुपये की फंडिंग हासिल की है। चेन्नई और बेंगलुरु में महिला उधारकर्ताओं की संख्या कम होने के बावजूद, क्रमशः 631 करोड़ रुपये और 603 करोड़ रुपये का सबसे अधिक लोन दिया गया है, जो महिला-संचालित बिजनेस में बड़े पैमाने पर कार्यशील पूंजी की जरूरतों को दर्शाता है। जयपुर में पहली बार बैंक/संस्थागत लोन लेने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक 15% है, जो बैंकिंग और वित्तीय प्रणालियों के लगातार विस्तार का संकेत देती है। वहीं, चंडीगढ़ में 89% बार-बार लोन लेने वाली महिलाओं की दर यह बताती है कि वे अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए बैंक लोन का इस्तेमाल एक नियमित साधन के रूप में कर रही हैं।

प्रोगकैप की सह-संस्थापक पल्लवी श्रीवास्तव के अनुसार, पहली बार लोन देने की तुलना में बार-बार लोन लेना उद्यमियों की प्रगति का अधिक सटीक और महत्वपूर्ण पैमाना है।

“लोन मिलना तो केवल पहला कदम है, लेकिन बार-बार लोन लेना यह बताता है कि क्या वह लोन सच में बिजनेस को बढ़ाने में मदद कर रहा है। जब उद्यमी कार्यशील पूंजी के लिए दोबारा आती हैं, तो यह औपचारिक बैंकिंग प्रणाली पर उनके भरोसे और एक ऐसे बिजनेस को दर्शाता है जो केवल टिकने के बजाय लगातार आगे बढ़ रहा है। हम देख रहे हैं कि महिला उद्यमी अब ऋण का इस्तेमाल एक लंबे समय के विकास साधन के रूप में कर रही हैं, और यह भारत के एमएसएमई इकोसिस्टम के लिए एक बहुत ही उत्साहजनक बदलाव है।”

राष्ट्रीय स्तर पर, प्रोगशक्ति ने 4,651 महिला उद्यमियों के लिए 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का लोन उपलब्ध कराया है। प्रोगकैप के कुल लोन पोर्टफोलियो में अब महिला उधारकर्ताओं की हिस्सेदारी 17% है, जिसमें सालाना आधार पर 40% की वृद्धि हो रही है। साथ ही, इसके 90% लाभार्थी छोटे शहरों यानी टियर 2 और टियर 3 बाजारों से आते हैं। ये सभी आंकड़े मिलकर यह दर्शाते हैं कि महिला-संचालित उद्यमिता को लेकर चर्चा अब केवल ‘लोन मिलने’ तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘बिजनेस के लगातार आगे बढ़ने’ की दिशा में मुड़ रही है।

Viyasmani Tripaathi

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