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जैतवारा सेक्टर में कलश यात्रा, जल स्रोत पूजन के साथ ग्रामीणों ने लिया जल-पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

*जैतवारा सेक्टर में कलश यात्रा, जल स्रोत पूजन के साथ ग्रामीणों ने लिया जल-पर्यावरण संरक्षण का संकल्प*
जैतवारा।
गंगा दशहरा के पावन के अवसर पर जैतवारा क्षेत्र में जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को समर्पित एक विशाल जन-जागरण कार्यक्रम का आयोजन नवांकुर संस्था शिवा ग्रामीण विकास संस्थान के सहयोग से किया गया। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. राजेश तिवारी के कुशल निर्देशन तथा विकासखंड समन्वयक विजयेन्द्र जड़िया के सतत मार्गदर्शन में जैतवारा सेक्टर की सक्रिय ग्राम और नगर विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा यह प्रेरणा दायी आयोजन शिवा ग्रामीण विकास संस्थान के सेक्टर प्रभारी बृजेन्द्र सिंह की सक्रिय सहभागिता से संपन्न हुआ।कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक उत्साह और श्रद्धा के साथ भव्य कलश यात्रा से हुआ। यात्रा के दौरान “जल ही जीवन है”, “जल बचाओ-भविष्य बचाओ” तथा “पर्यावरण संरक्षण हमारा कर्तव्य” जैसे नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। इसके पश्चात अतिथियों एवं समिति पदाधिकारियों द्वारा विधि-विधान से जल स्रोतों एवं वृक्षों का पूजन कर जल और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया।संदेश के साथ धरातल पर दिखा श्रमदान इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह रही कि कार्यक्रम केवल औपचारिक भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उपस्थित ग्रामीणों और समिति सदस्यों ने स्वयं आगे बढ़कर सामूहिक श्रमदान किया। जल स्रोतों के आसपास सफाई अभियान चलाया गया तथा उनके संरक्षण और पुनर्जीवन का सामूहिक संकल्प लिया गया।कार्यक्रम में जैतवारा सेक्टर की विभिन्न ग्राम विकास प्रस्फुटन समितियों द्वारा अपने ग्राम और नगर में सराहनीय कार्य क्रम आयोजित किए जिनमें प्रमुख रूप से —पिपरी टोला,खांच,नयागांव,सुजावल खुर्द,जैतवारा,मझगवां(झरी)
इन समितियों के सदस्यों भइयन विश्वकर्मा,संध्या अग्निहोत्री,अर्चना साकेत, राम कुंडल तिवारी,विजय सोनी,समर भान सिंह,किशन शर्मा,दुर्गा गौतम,शिवेंद्र दुबे,अतुल तिवारी,समर बहादुर सिंह,परामर्शदाता शिखा सिंह की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम में ग्रामीण महिलाओं, पुरुषों, युवाओं एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर समाज को जल एवं पर्यावरण संरक्षण का सकारात्मक संदेश दिया।
संकल्प के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी नागरिकों ने जीवनदायिनी नदियों, तालाबों और स्थानीय जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ अधिक से अधिक वृक्षारोपण कर प्रकृति को हरा-भरा बनाए रखने की सामूहिक शपथ ली। यह आयोजन क्षेत्र में जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण अभियान का प्रेरणास्रोत बनकर उभरा।

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