
ब्यूरो रिपोर्ट… रामपाल सिंह धनगर
किच्छा… विधायक प्रतिनिधि गौरव बेहड़ ने हरीश पनेरू के बयान पर कहा की उन्होंने बेहड़ जी को नसीहत दी की पार्टी हाईकमान से बंद कमरे में बात करनी चाहिए थी, जबकि बेहड़ जी द्वारा कांग्रेस पार्टी के खिलाफ एक भी शब्द नही बोला गया है, उन्होंने ये कहा की प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा जी द्वारा मुझसे वादा किया था के आपसे व पार्टी के वरिष्ठ लोगो से वार्ता कर ही आगे का फैसला लिया जायेगा जबकि ऐसा नही हुआ। बेहड़ जी ने कुमाऊँ के महत्वपूर्ण पदों को लेकर भी अपने विचार रखे हैं, उन्होंने कहा की बेहड़ जी ने गढ़वाल के लिए पदों को लेकर भी अपनी राय रखी है, कंग्रेस पार्टी माने या ना माने यह पार्टी का फैसला है। गौरव ने कहा की बेहड़ जी को सन 2002 में कांग्रेस की सादस्य्ता दिलाने में स्व पंडित नारायन्दत्त तिवारी जी, स्व श्रीमती इंद्रा ह्रदयश जी,पचौरी जी व गुलाम नबी आजाद जी के सयुक्त प्रयासों से दिलाई गई थी, उसके बाद पार्टी ने बेहड़ जी को रुद्रपुर/किच्छा से विधानसभा से टिकट भी दिया था। कहना चाहता हूँ के हरीश पैनरू जो आज हाईकमान का फैसले की बात कर रहे हैं उस समय इनका अनुशासन कहाँ गया था ज़ब पनेरू व इनके पूरे परिवार द्वारा कांग्रेस के बागी उम्मीदवार स्व श्रीमती रीता गवा जी को चुनाव लड़ाया गया था। हरीश पनेरू द्वारा कांग्रेस पार्टी के विरोध में पोलिंग एजेंट तक बनाये गए थे, उसके बाद 2012 में किच्छा विधानसभा से कांग्रेस पार्टी ने हाजी सरवर खां को प्रत्याशी बनाया तब भी हरीश पनेरू ने विरोधी पार्टी का साथ दिया और पुन:2022 का इतिहास दोहराया था।
गौरव ने कहा की किच्छा से पूर्व मुख्यमंत्री व उस समय वर्तमान सी एम हरीश रावत जी ने चुनाव लड़ने का फैसला लिया था तब हरीश रावत जी का सबसे ज्यादा विरोध करने वाला हरीश पनेरू थे खुलकर इनके द्वारा हरीश रावत जी का विरोध किया गया था, उनके लिए kitne अपशब्द इतने द्वारा बोले गए थे ये सब जानते हैं।
गौरव ने कहा की 2022 के चुनाव में बेहड़ जी किच्छा विधानसभा से टिकट मांग रहे थे, टिकट माँगने का अधिकार सबका है, उनके खिलाफ हरीश पनेरू व उनके साथियों द्वारा कितने अपशब्दों का व गन्दी भाषा का प्रयोग किया था, जबकि बेहड़ जी उस समय प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष थे, उस समय हरीश पनेरू का अनुशासन कहाँ गया था, इनके द्वारा किये गए कृत्य की विडिओ भी सोशल मिडिया पर उपलब्ध है, इसकी सारी जानकारी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी गई थी, ज़ब बेहड़ जी को टिकट मिला था उस समय पार्टी के फैसले के खिलाफ निर्दलीय के रूप में नामांकन करने वाले कौन था या पनेरू जानते हैं, नामांकन के बाद पर्चा वापसी के लिए पार्टी के नेता जो आज जनप्रतिनिधि हैं उन्होंने पनेरू से वार्ता कर अनुरोध किया था उनके अनुरोध पर मैं स्वंय पनेरू जी के घर गया था उस समय इन्होंने क्या क्या डिमांड रखी थी, किच्छा तैयारी में मेरा लाखो रुपय खर्च हो गया है वो कौन वापिस देगा, जिसके बाद में वापिस आ गया था, बाद में परचा वापिस हुआ, इन सभी बातों के साक्ष्य व रिकॉर्डिंग जो वार्ता करवा रहे थे उन्होंने कहा था के आप मैनेज कर लो, ऐसे सभी साक्ष्य हमारे पास है। गौरव ने कहा की मेरे पिता जी इस तरह की राजनीती में पड़ना नही चाहते, उन्होंने विकास के रिकॉर्ड बनायें हैं चाहे उत्तर प्रदेश के समय की हल्द्वानी विधानसभा हो या रुद्रपुर किच्छा विधानसभा हो या स्वास्थ्य का क्षेत्र हो चिकित्सा स्वास्थ्य का क्षेत्र हो पूरे उत्तराखंड में रिकॉर्ड बनाया है।
गौरव ने कहा की हमारा परिवार व्यक्तिगत राजनीती में नही पड़ना चाहता जिस तरह से सी पी शर्मा द्वारा हलके शब्दों का उपयोग किया है जिसमें उनके द्वारा किच्छा विधानसभा व मुझ पर कटाक्ष किये हैं उन्होंने सारी मर्यादाएं पर कर दी है उनको आने वाले समय में इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा और मुह तोड़ जवाब दिया जायेगा। पहली बार संगठन के किसी व्यक्ति ने 20 साल की राजनीती में इस तरह से हलके शब्दों का प्रयोग किया है जिसे बर्दाश नही किया जायेगा, किसकी शह पर सी पी शर्मा द्वारा यह कृत्य किया गया है उसका आका कौन है सबको जवाब दिया जायेगा।
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