देशधर्मबीकानेरब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
गौ सम्मान अनुष्ठान समापन परसैकड़ों लोगों ने शपथ ली और गौ सेवा का संकल्प
गौ को राष्ट्र माता का दर्जा दिलाने की मांग की

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। संत भावनाथ आश्रम स्थित गौ शाला में चल रहे गौ सम्मान अनुष्ठान के समापन पर बड़ी संख्या लोग शामिल हुए। संत भावनाथ महाराज के सानिध्य में लोगों ने गौ रक्षा के लिए हर प्रयास में आगे रहने की शपथ ली। स्थानीय स्तर पर शहर में गायों की स्थिति बेहतर बने इसके लिए सभी को 5 संकल्प दिलाए गए। जिसमें बुजुर्ग युवा सभी शामिल हुए।
गौ सेवा एवं सुरक्षा के 5 संकल्प:
1.आस पास पॉलीथिन को एकत्रित कर उसका निस्तारण करना ताकि गायें पालीथीन खाकर बीमार न पड़े।नित्य गौ ग्रास देना जरूर देना।
2.जन्म दिन,विवाह वर्ष गांठ अथवा मांगलिक उत्सव पार्टी के दिन सबसे पहले गौ शाला में गायों को लापसी अथवा यथा सामर्थ्य चारा-गुड खिलाना।
3. साल में कम से कम एक दिन गौ शाला श्रम दान करना।
4.प्रतिदिन 10 रुपए अथवा 1 रुपए गौ सेवा के लिए एकत्रित कर गौ शाला अथवा जहां आस पास जरूरत हो वहां गाय के चारा या दवाई खर्च में लगाना।
5.गौ सम्मान में कोई आयोजन,गौ नाम संकीर्तन जाप,प्रार्थना में यथा संभव शामिल होने की कोशिश
करना ।
महा आरती हुई, राष्ट्र माता सम्मान की मांग की:
अनुष्ठान समापन पर उपस्थित श्रद्धालुओं गौ सेवकों ने जोश उमंग के साथ गौ माता की जय का उदघोष किया,झालर,शंख बजाए गए जिससे पूरा क्षेत्र गूंज उठा। इस अवसर गाय की पूजा कर महाआरती की गई पं. सुरेश एवं प. बद्री महाराज ने वेद मंत्र पढ़े ।आरती के बाद गौ हत्या बंद हो,विश्व का कल्याण हो तथा गौ माता की जय हो का सामूहिक उदघोष किया गया । तथा गाय को राष्ट्र माता का सम्मान के लिए मंच से सरकार से मांग की गई।
वक्ताओं ने गाय की आवश्यकता पर दिया बल:
गाय संकट में है, तो इसे केवल पशु का संकट न समझें—यह पूरी मानव जाति और पृथ्वीं के अस्तित्व का संकट है । ये उदगार संत भावनाथ आश्रम स्थित गौ शाला में चल रहे गौ सेवा सम्मान अनुष्ठान में आश्रम के अधिष्ठाता संत भावनाथ महाराज ने व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने भी गौ सेवा की थी जो हम सबके लिए संदेश है कि गाय का दर्जा भगवान से भी बड़ा है।
गणेश लखारा,केदार सारस्वत,विष्णु भाटी,झवरलाल कछावा,पूर्ण सिंह,सुमेर सिंह ने आधुनिक युग में रसायनिक खेती के दुष्प्रभाव से बढ़ती बीमारियों से बचाव के लिए देशी गाय के मूत्र,गोबर,दूध की उपयोगिता बताई ।बजरंग राजपुरोहित,भूरा राम कुम्भार एवं सोहन लाल उपाध्याय ने कहा कि अगर गाय नहीं रहेगी, तो विषैला अन्न खाना पड़ेगा; और जब अन्न विषैला होगा । मंच पर उपस्थित सभी वक्ताओं का मत था कि आधुनिक युग के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए में गौ पालन की आवश्यकता है।
अनुष्ठान के संयोजक प्रहलाद ओझा ‘भैरूं’ ने इस अवसर पर कहा कि गाय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्व रखती हे बल्कि सामाजिक परम्परा, संस्कृति ,स्वास्थ्य और समृद्धि की दृष्टि से महत्व रखती है।गाय के बिना सामाजिक सांस्कृतिक जीवन संभव नहीं ।

Subscribe to my channel


