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श्रावणी महापर्व हमें अपने ऋषियों के तर्पण और सनातन धर्म को धारण करने की प्रेरणा देता है-ओम प्रकाश आर्य

बस्ती 28अगस्त।

*श्रावणी महापर्व हमें अपने ऋषियों के तर्पण और सनातन धर्म को धारण करने की प्रेरणा देता है-ओम प्रकाश आर्य*

आर्य समाज हमेश जनमानस को अपने प्राचीन सनातन धार्मिक पर्वों को याद दिलाता रहा है आज जिस पर्व को हम भाई बहन के आपसी प्रेम, सुरक्षा और समर्पण के लिए बड़े ही हर्षोल्लास से मना रहे हैं वह चातुर्मास का श्रावणी उपाकर्म महापर्व है। यह श्रावणी महापर्व हमें अपने ऋषियों के तर्पण और सनातन धर्म को धारण करने की प्रेरणा देता है। यह बातें आर्य समाज नई बाजार बस्ती में श्रावणी पूर्णिमा पर आयोजित वैदिक यज्ञ के अवसर पर ओम प्रकाश आर्य ने कही। इससे पूर्व उपस्थित लोगों ने वेद मंत्रों के साथ अपने पुराने यज्ञोपवीत बदले और ऋषियों के तर्पण के लिए वेदपाठ कर आहुतियां दीं और बहनों ने भाइयों को रक्षासूत्र बांधकर उनसे अपनी सुरक्षा सेवा का व्रत ग्रहण कराया।

इस अवसर पर ओम प्रकाश आर्य प्रधान आर्य समाज नई बाजार बस्ती ने बताया कि श्रावणी पूर्णिमा के दिन उपनयन परिवर्तन करने का यह शुभ पर्व है । पुरातन काल में इस दिन से चार मास तक वेद का विशेष पठन पाठन होता था और पौष मास में इसका समापन होता था । श्रावण मास को हमारे जीवन का अभिन्न अंग समझा जाता था । इस पर्व को “ऋषि तर्पण” करने का स्वर्णिम अवसर माना जाता था। श्रावण मास में वेद तथा उसके अनुकूल आर्ष ग्रंथो को श्रवण जाता है इसलिए “श्रावण” मास कहा जाता है । इस काल में वर्षा के कारण सारे मनुष्य को अधिक से अधिक समय अपने घर पर ही व्यतीत करना पड़ता है। ऐसे अवसर को हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों के स्वाध्याय, चिंतन, मनन एवं आचरण के लिए अनुकूल माना है । वेदों के स्वाध्याय एवं आचरण से मनुष्य अपनी आध्यात्मिक और भौतिक दोनों प्रकार की उन्नति कर सकता है । श्रावण मास उत्पन्न में कीट,पतंग, वायरस, बैक्टीरिया के प्रकोप को शांत करने हेतु “वेद परायण यज्ञ” को इसमें सम्मिलित किया जाता है।

   वैदिक संस्कृति की उच्च भावना का विस्मरण करके आज केवल हम रक्षाबंधन पर्व मना रहे हैं और भाई बहन तक सीमित रह गया है । इस पर्व पर सभी को संकल्पित होकर परस्पर रक्षा करने का व्रत लेना चाहिए ।

यज्ञोपवीत के तीन धागे बताते हैं कि हम पर तीन ऋण है, जो हमे उतारना अनिवार्य है, वह है – ऋषि ऋण, देव ऋण और पितृ ऋण । श्रावण मास के चार मास में हम स्वाध्याय, सत्संग, साधना, सेवा, समाधान का पंचामृत ग्रहण करके तीनो ऋण से उऋण हो सकते है ।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से नितीश कुमार, शिव श्याम, अरविन्द साहू, कार्तिकेय, कार्तिक, कृष्णा, गणेश आर्य, धर्मेंद्र कुमार, शिव श्याम, रजनीश कुमार, नवल किशोर चौधरी, राजेश्वरी, रिमझिम, दृष्टि मोदनवाल, परी, पुनीत राज, शुभम राजभर, हिमांशु, ऋषि कुमार, महिमा, राधा देवी, नंदिनी, निधि, और अर्पिता सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

*गरुण ध्वज पाण्डेय*

Viyasmani Tripaathi

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