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शाहनगर में आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर बुलडोजर’ और धांधली का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

लोकेशन=शाहनगर।मध्य प्रदेश पन्ना
संवाददाता=सुधीर अग्रवाल के साथ कैमरा मेन मुकेश रजक
*शाहनगर में आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर बुलडोजर’ और धांधली का आरोप, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन*
पन्ना,शाहनगर तहसील अंतर्गत ग्राम लमतरा में राजस्व और वन भूमि को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। ग्रामीणों और पीड़ित पक्ष का आरोप है कि हल्का पटवारी और वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से गरीब आदिवासियों और किसानों की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जा रहा है, और नियमों को ताक पर रखकर उनके अधिकारों का हनन हो रहा है। इस संबंध में के.पी. सिंह बुंदेला के नेतृत्व में पीड़ितों ने पन्ना कलेक्टर के नाम एक गंभीर शिकायती ज्ञापन सौंपा है।
जेसीबी चलाकर फसल और बाउंड्रीवॉल तहस-नहस करने का आरोप
सौपे गए ज्ञापन के अनुसार, ग्राम लमतरा के किसान पीढ़ी-दर-पीढ़ी कुछ जमीनों पर कब्जा कर खेती-किसानी करते आ रहे हैं। आरोप है कि हल्का पटवारी द्वारा दुर्भावनापूर्ण तरीके से जेसीबी (JCB) मशीन चलवाकर राजस्व एवं भूमि स्वामियों की जमीनों की मेड़-बंधान, फसल सुरक्षा दीवार (बाउंड्रीवॉल) और अन्य निर्माणों को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया गया। इस ज्यादती के खिलाफ बीती 7 जून को ग्रामीणों ने एक ‘महापंचायत’ भी बुलाई थी, जिसमें निराकरण न होने पर उपस्थित नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया था।
जीवित व्यक्ति को कागजों में ‘मृत’ बताकर पट्टा जारी करने का बड़ा फर्जीवाड़ा
शिकायत में राजस्व विभाग की एक बहुत बड़ी लापरवाही या सोची-समझी धांधली का पर्दाफाश किया गया है। शाहनगर तहसीलदार द्वारा जारी एक प्रतिवेदन (दिनांक 13/06/2026, क्रमांक/350/प्रवाचक/2026) का हवाला देते हुए बताया गया कि व्यवस्थापन का एक पट्टा ‘ममता बाई बेवा बालाप्रसाद परोहा’ के नाम पर जारी किया गया है। इसमें बालाप्रसाद परोहा को ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बालाप्रसाद परोहा आज भी जीवित हैं! जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए इस भूमि व्यवस्थापन के खेल ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि आदिवासियों के वन अधिकार के दावे पिछले डेढ़ वर्ष से एसडीएम (SDM) कार्यालय में लंबित पड़े हैं, जिन पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वन अधिनियम की उपधाराओं के तहत सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कोई बेदखली की जा सकती है, लेकिन शाहनगर क्षेत्र के पगरी, बरतला, और कल्दा क्षेत्र के बड़ी खमरिया जैसे गांवों में नियमों को ताक पर रखकर आदिवासियों को हटाया जा रहा है।
प्रमुख मांगें:
1.जीवित व्यक्ति को मृत बताकर किए गए फर्जी भूमि व्यवस्थापन और पट्टे की उच्च स्तरीय जांच हो।
2.हल्का पटवारी द्वारा जेसीबी चलाकर किसानों की फसलों और मेड़ को नुकसान पहुंचाने की जांच कर मुआवजा दिया जाए।
3.वन विभाग के कर्मचारियों से आदिवासियों के दावों की मूल पावती वापस दिलाई जाए।
4.वन अधिकार अधिनियम के तहत लंबित दावों का जल्द से जल्द विधि अनुसार निराकरण किया जाए।
इस पूरे मामले में अब देखना यह होगा कि पन्ना जिला प्रशासन इन गंभीर आरोपों और दस्तावेजी साक्ष्यों के सामने आने के बाद दोषी कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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