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जम्मू-कश्मीर में घर-घर कचरा संग्रहण को लेकर बड़ा निर्देश, एक हफ्ते में तैयार होंगे जिला स्वच्छता प्लान

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
श्रीनगर, 29 अप्रैल 2026: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव मोहम्मद एजाज़ असद ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में सभी जिलाधिकारियों (DCs) को निर्देश दिया है कि वे एक सप्ताह के भीतर व्यापक जिला स्वच्छता योजना (District Sanitation Plan) तैयार करें। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर कचरा संग्रहण (Door-to-Door Waste Collection) को पूरी तरह लागू करना है।
सचिव ने कहा कि इन योजनाओं की शुरुआत पंचायत स्तर पर उपलब्ध स्वच्छता संसाधनों की मैपिंग से होनी चाहिए। इसमें सेग्रिगेशन शेड, प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट (PWMUs), कम्पोस्ट पिट, सोक पिट, कचरा संग्रहण केंद्र, परिवहन साधन और अन्य संसाधनों को शामिल किया जाएगा, ताकि इन्हें प्रभावी ढंग से कचरा प्रबंधन श्रृंखला से जोड़ा जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि पंचायतवार कचरा संग्रहण रूट तय किए जाएं, आवश्यक मानव संसाधन का आकलन किया जाए और घरों से कचरा संग्रहण को वैज्ञानिक प्रसंस्करण व निस्तारण केंद्रों से जोड़ा जाए। जिला योजनाओं के प्रस्तुत होने के बाद क्लस्टर स्तर पर समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
सचिव ने यह भी कहा कि पूर्व में कई स्वच्छता संसाधन अनुपयुक्त स्थानों पर बनाए गए थे, जिससे उनका पूरा उपयोग नहीं हो पाया। इसलिए भविष्य की योजनाओं में सुलभता, उपयोगिता और दीर्घकालिक स्थिरता पर विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने Solid Waste Management Rules-2026 के सख्त अनुपालन पर जोर देते हुए कहा कि स्रोत पर कचरे का चार श्रेणियों में विभाजन अनिवार्य किया जाए—
गीला कचरा
सूखा कचरा
सैनिटरी कचरा
विशेष देखभाल कचरा
इसके अलावा दवाइयों, पेंट और थर्मामीटर जैसे घरेलू खतरनाक कचरे को भी अलग से संभालने के निर्देश दिए गए।
वित्तीय स्थिरता को लेकर सचिव ने बताया कि अब घर-घर कचरा संग्रहण, सेग्रिगेशन और स्वच्छता संसाधनों के संचालन एवं रखरखाव के लिए अलग से फंड निर्धारित किया गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यूजर चार्ज (User Charges) की नियमित वसूली जरूरी है, ताकि यह व्यवस्था लंबे समय तक टिकाऊ बनी रहे।
उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन केवल सरकारी फंड पर निर्भर “लीकिंग बकेट” नहीं बनना चाहिए, बल्कि इसमें जनभागीदारी, लागत वसूली और स्थानीय प्रबंधन की अहम भूमिका होनी चाहिए।
सचिव ने जागरूकता बढ़ाने के लिए IEC (Information, Education & Communication) अभियान को मजबूत करने पर जोर दिया और पर्यटन स्थलों, बाजारों, अस्पतालों, स्कूलों, शहरी-ग्रामीण सीमावर्ती क्षेत्रों और पुराने कचरा स्थलों को विशेष फोकस क्षेत्र बताया।
जिला प्रशासन को सड़कों के किनारे कचरा फेंकने, गांवों में गोबर के ढेर, जाम नालियों और खुले में कचरा जलाने जैसी गतिविधियों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में ग्रामीण स्वच्छता की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर भी प्रस्तुति दी गई, जिसमें ग्राम पंचायतों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भागीदारी को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

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