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शिव कथा श्रवण एवं भक्ति के लिये अहंकार का त्याग आवश्यक-आचार्य बजरंग शास्त्री

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा
*नारनौल टुडे न्यूज़*
कुलताजपुर में चल रही शिव पुराण के छठे दिन आचार्य बजरंग शास्त्री जी महाराज ने कहा कि शिव महापुराण कथा श्रवण व शिव भक्ति के लिए पहले अहंकार दूर करना होगा। क्योकि जब तक अहंकार होता है तब तक भोलेनाथ प्रसन्न नही होते है। जिस प्रकार आदि देव महादेव को भोलेनाथ कहा जाता है इसलिये उनको भक्त भी भोले पसंद है। जब तक अहंकार दूर नही होगा तब तक शिव की भक्ति प्राप्त होना कठिन है। इसलिये
शिव की प्राप्ति के लिए अहंकार त्यागना होगा।
*शिव कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि शिव और पार्वती के दो पुत्र हुए एक का नाम कार्तिकेय और दूसरे का नाम गणेश है। कार्तिकेय पुरुषार्थ का प्रतीक माना गया है। पुराणों में श्री गणेश की अनेक कथाएं प्राप्त होती हैं। एक कल्प में साक्षात श्रीकृष्ण उनके पुत्र बनते हैं दूसरे कल्प में पार्वती के उबटन से उनकी उत्पत्ति होती है। एक कल्प में शनि की दृष्टि से सिर कटता है और दूसरे में स्वयं शिवजी सिर काटते हैं। माता के कोप से बचने के लिए हाथी का सिर जोड़ा जाता है। हाथी का सिर बड़ा होता है, लेकिन आंखें छोटी होती हैं। यह सूक्ष्म दृष्टि का प्रतीक है। हमारी दृष्टि सूक्ष्म होनी चाहिए। कान सूप के जैसे मानो फालतू बात गणेश नहीं सुनते। एक दांत अर्थात जो बात कह दिया उसमें अटल रहते हैं और लम्बी नाक होना प्रतिष्ठा का प्रतीक है।*
कथा व्यास ने कहा कि जहां पर सूक्ष्म दृष्टि होती है, वहां विघ्न नही होता है और जहां विघ्न बाधा न हो तो वहीं बुद्धि -सिद्धि और शुभ लाभ का सदैव आगमन होता है।
आचार्य जी ने बताया की भगवान शंकर ने किस प्रकार त्रिपुर को दहन और उनका नाम त्रिपुरारी हुआ। शंखचूड़ और तुलसी की कथा का वर्णन करते हुए बताया की किस प्रकार भगवान नारायण ने तुलसी के शील को भंग किया और भगवान शंकर ने किस प्रकार शंखचूड़ का वध किया।
*आचार्य जी ने बताया की किस प्रकार से भगवान शंकर के पसीने से अंधकासुर की उत्पत्ति हुई और किस प्रकार यह हिरण्याक्ष का पुत्र बना भगवान विष्णु ने वराह अवतार धारण कर हिरण्याक्ष का वध किया ।उसके बाद हिरण्याक्ष के भाई हिरण्यकश्यप ने ब्रह्मा जी का तप किया और वरदान प्राप्त किया और ब्रह्मा जी के वरदान को पूर्ण करने के लिए और अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान नरसिंह के रूप में प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप का का वध किया इसका सुंदर वर्णन किया गया और भगवान नरसिंह भक्त प्रहलाद और हिरण्यकश्यप झांकी भी निकाली गई और सुंदर सुंदर भजन भी सुनाए जिसमें सभी ने झूमकर नाच कर अपनी हाजिरी लगाई।*
कथा के आयोजक ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओं से इस कथा आयोजन में भाग लेने की अपील की और बताया की जो लोग कथा में आने में असमर्थ हो वो इस कथा का लाइव प्रसारण आचार्य बजरंग शास्त्री जी यूट्यूब चैनल पर भी देख सकते हैं इस अवसर पर महंत प्रेमदास जी महाराज शहीद श्री गो गोपाल प्रचार एवं असहाय सेवा संस्थान के सभी सदस्य ,टाइगर क्लब के सभी सदस्य , योगिता परिवार एवं प्रभारी संगठन नारनौल के सभी सदस्य और नेकी की दीवार के सभी सदस्य सहित सैकड़ों महिला व पुरुष उपस्थित थे।

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