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काजरी में नाबार्ड वित्त पोषित तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण का शुभारंभ, प्रतिभागी किसानों को निशुल्क मिलेंगे एक-एक हजार सहजन पौधे

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर, 3 अगस्त। केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी), बीकानेर में नाबार्ड वित्त पोषित परियोजना के अंतर्गत “बीकानेर जिले में सतत एवं आर्थिक विकास के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली” विषय पर तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ सोमवार को किया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री सुरेश बिश्नोई तथा विशिष्ठ अतिथि नाबार्ड डीडीएम श्री अरविंद चाहर की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर श्री सुरेश बिश्नोई ने कहा कि सहजन (मोरिंगा) एक बहुउपयोगी एवं अत्यंत पौष्टिक पौधा है, जिसके औषधीय गुणों के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सहजन के विभिन्न उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर स्वरोजगार के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं तथा यह किसानों की पोषण एवं आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।साथ ही कहा कि बीकानेर की भुजिया इंडस्ट्री के साथ टाइअप करके बीकानेरी सहजन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी जा सकती है।

नाबार्ड के डीडीएम श्री अरविंद चाहर ने कहा कि सहजन आधारित कृषि प्रणाली रोजगार सृजन, आर्थिक समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच सहजन टिकाऊ कृषि (सस्टेनेबल एग्रीकल्चर) को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण पौधा है तथा भविष्य की कृषि के लिए यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। उन्होंने किसानों से अधिकाधिक संख्या में इस परियोजना का लाभ उठाने का आह्वान किया।

काजरी के अध्यक्ष डॉ. नवरत्न पंवार ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान में सहजन आधारित खेती खाद्य एवं आर्थिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि सहजन का उपयोग पशु आहार के रूप में भी किया जा सकता है, जिससे पशुओं के दूध एवं मांस उत्पादन के साथ उनके स्वास्थ्य में भी सुधार होता है। उन्होंने बताया कि काजरी से पौधे प्राप्त कर अनेक किसान सहजन की खेती एवं उसके उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर विपणन भी प्रारंभ कर चुके हैं। उन्होंने जानकारी दी कि इस परियोजना का अंतिम प्रशिक्षण 10 से 12 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा।

परियोजना के मुख्य समन्वयक डॉ. बीरबल मील ने सहजन को “सुपरफूड” बताते हुए कहा कि आयुर्वेद के अनुसार इसमें अनेक औषधीय गुण पाए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सहजन की पत्तियों, फलियों एवं पाउडर को दैनिक आहार में शामिल कर बेहतर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने किसानों से प्रकृति के इस अमूल्य उपहार को अपनाने और अपने परिवार को स्वस्थ रखने का आह्वान किया।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के इस 23 वें बैच में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से 35 किसान भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन के पौधे निःशुल्क प्रदान किए जाएंगे। नाबार्ड वित्त पोषित इस परियोजना के तहत अब तक 250 किसान लाभान्वित होकर अपने खेतों में सहजन की खेती प्रारंभ कर चुके हैं।

कार्यक्रम के संचालन एवं आयोजन में काजरी के वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी डॉ. मनोज गोरा एवं डॉ. सीताराम जाट ने सहयोग प्रदान किया।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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