उत्तर प्रदेशबस्तीशायरी

इश्क, मोहब्बत और खामोशी को बयां करतीं पांच शायरियां

इश्क, मोहब्बत और खामोशी को बयां करतीं पांच शायरियां

1. आखिरी ख्वाहिश

फिर आवाज़ आई है, आ जा गले लग जा मेरे,

भले ही तू हरजाई है, आ जा गले लग जा मेरे।

सुना है मरने वालों की आखिरी ख्वाहिश पूरी करते हैं,

मैं आखिरी सांस पर हूँ, अब तो गले लग जा मेरे।

2. इश्क और बेबसी

ये खुदमस्त लोग जो मुझसे इश्क मांगते हैं,

यानी ज़हर की पोटली से ज़हर मांगते हैं।

मैं बेबस हूँ, इसलिए इश्क नहीं करती,

और कुछ लोग इसे मेरा तकब्बुर मानते हैं।

3. नज़र-ए-इश्क

मेरी ज़िंदगी में इश्क का किरदार कुछ यूं समझिए,

अगर मैं न दूं पानी तो पौधा सूख जाएगा।

मैंने नज़र-ए-इश्क से दिल को बचा रखा है, क्योंकि

बुरी नज़र पड़ते ही ये पौधा सूख जाएगा।

4. अधूरी मोहब्बत

मोहब्बत पूरी न हुई, मगर कहानी रह गई,

ज़ख्म भर गए, मगर निशानी रह गई।

उसने तो सारी कहानी लफ़्ज़ों में कह दी, लेकिन

मेरी तो सारी बातें खामोशी ही कह गई।

5. मौसम का असर

जो कहते हैं कि तुम पहले जैसे नहीं रहे,

वो ये बात जान लें—

पेड़ आज भी वही है,

बस ये मौसम का असर है।

 *लेखिका अंजली पाण्डेय*

Viyasmani Tripaathi

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