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मोहब्बत, जुदाई और यादों के नाम तीन शायरियाँ

मोहब्बत, जुदाई और यादों के नाम तीन शायरियाँ

मोहब्बत सिर्फ किसी को पाने का नाम नहीं, बल्कि कभी-कभी उसकी सलामती की दुआ करने का भी नाम है। जुदाई का दर्द, अधूरी चाहत और बीते रिश्तों की यादें जब शब्दों का रूप लेती हैं, तो शायरी दिल की गहराइयों को छू जाती है। पेश हैं मोहब्बत और जुदाई के एहसास से जुड़ी तीन खूबसूरत शायरियाँ।

1. महबूब की सलामती की चाह

कई दफ़ा मुझमें भी उमड़ी मोहब्बत की चाह पर,

मुझे महबूब हासिल नहीं, सलामत चाहिए था।

उसके न मिलने का सदमा सर पर नहीं चढ़ा, क्योंकि

मुझे तो उसका उम्र-ए-दराज़ चाहिए था।

2. तेरी कहानी में मेरा किरदार

फ़रेब-ए-इश्क़ का तेरा व्यापार अच्छा है,

नदामत को छुपाने का तेरा अंदाज़ अच्छा है।

तेरी कहानी में मैं क्या थी, नहीं पता, पर

मेरी कहानी में तेरा किरदार अच्छा है।

3. जुदाई का असर

यक़ीन कर, आज भी नब्ज़-ए-बेकरारी वैसी ही है,

दिल-ए-ज़मीं की हालत कब्रिस्तान जैसी ही है।

तेरे जाने का असर कुछ यूँ हुआ कि,

जिस्म की रौनक माह-ए-नौ जैसी ही है।

 *लेखिका अंजली पाण्डेय*

Viyasmani Tripaathi

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