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पीबीएम अस्पताल प्रकरण: रात में पोस्टमार्टम पर उठे सवाल, धार्मिक भावनाओं की अनदेखी का आरोप

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते मृत हुई प्रीति के मामले में प्रशासन द्वारा रात में ही पोस्टमार्टम कराए जाने को लेकर विवाद गहरा गया है। इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कुछ लोगों ने इसे हिंदू धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के विपरीत बताते हुए प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
आलोचकों का कहना है कि हिंदू धर्म में रात्रि के समय अंतिम संस्कार और मृत शरीर से जुड़े कुछ कार्यों को लेकर विशेष मान्यताएं एवं परंपराएं रही हैं। ऐसे में रात में जल्दबाजी में पोस्टमार्टम कराए जाने से लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन को मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सूर्योदय तक प्रतीक्षा करनी चाहिए थी।
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने कहा है कि जो राजनीतिक दल चुनाव के दौरान सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों की बात करते हैं, उनके शासनकाल में ही धार्मिक मान्यताओं की अनदेखी होना चिंताजनक है। उन्होंने प्रशासन से इस निर्णय के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट करने की मांग की है।
वहीं, लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ऐसी कौन सी आपात स्थिति थी, जिसके कारण प्रशासन ने रात में ही पोस्टमार्टम कराने का फैसला लिया। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब मामला गंभीर आरोपों, जनआक्रोश और चिकित्सकीय लापरवाही के दावों से जुड़ा हुआ है, तब पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवेदनशीलता बरतना आवश्यक था।
फिलहाल इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। वहीं, मृतका के परिजन और विभिन्न सामाजिक संगठन निष्पक्ष जांच तथा पूरे घटनाक्रम की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से जवाब की अपेक्षा कर रहे हैं।

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