अलवरब्रेकिंग न्यूज़राजस्थान
निष्काम सेवा की सुगंध, समर्पण की आभा -79 वां वार्षिक संत समागम जहां हर कदम सेवा और हर भाव समर्पण का

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
अलवर 5 अक्टूबर 2026
संत निरंकारी मिशन का 79 वां वार्षिक संत समागम 23 से 26 अक्टूबर 2026 तक समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर भव्यता पूर्वक आयोजित किया जाएगा जहां हर कदम मानव कल्याण की राह पर बढ़ेगा, हर भाव समर्पण में ढलेगा और हर हृदय प्रेम की उस दिव्य ज्योति से आलोकित होगा
इस भव्य संत समागम में अलवर जिले से भी श्रद्धालु भक्त तन मन से सेवा कर रहे हैं समागम सम्मिलित होने के लिए हर श्रद्धालु, सेवादार भाई बहन रेल ,बसो द्वारा जाने के लिए उत्सुक है इस पावन समागम की शुभ सूचना से श्रद्धालुओं के हृदय आनंद उमंग और प्रभु प्रेम की अनुपम अनुभूति से प्रफुल्लित है इस दिव्य उत्सव की तैयारी श्रद्धा समर्पण लग्न नि :स्वार्थ सेवा भाव के साथ पूरे उत्साह से चल रही है समागम स्थल का प्रत्येक कोना सेवा भक्ति और समर्पण की जीवंत छवि प्रस्तुत कर रहा है
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के पावन सानिध्य में यह समागम प्रेम सेवा, सद्भाव और मानव एकता की दिव्य भावना का संदेश होगा
अंतर्मन में जब प्रभु का प्रकाश जाता है तब जीवन की दिशा बदल जाती है सेवा में समर्पण, सुमिरन में शांति और सत्संग में सत्य की अनुभूति होने लगती है इस वर्ष का वार्षिक निरंकारी संत समागम श्रद्धालुओं के लिए एक अनुपम आध्यात्मिक यात्रा बनेगा जिसका प्रेरणादायी विषय है जागृति
कोई निर्माण कार्य में सहयोग दे रहा है, कोई शामयाने सजा रहा है, तो कोई स्वच्छता, जल, स्वास्थ्य और भोजन सेवा को सुव्यवस्थित करने में लगा है वही वार्षिक निरंकारी संत समागम की भव्यता को दर्शाता मुख्य प्रवेश द्वार भी आकर ले रहा है, जो प्रेम, समरसता और आत्मिक एकत्व की ओर बढ़ते कदमों का प्रतीक बनकर श्रद्धालुओं का स्वागत करेगा सेवा भाव के इस अनुपम छटा को देखकर सहज ही अनुभव होता है कि सेवकों के चेहरे पर परिश्रम की थकान नहीं बल्कि संतोष और समर्पण की दिव्य आभा झलक रही है
*तन पवित्र सेवा किये, धन पवित्र दिए दान,
मन पवित्र हरि भजन सो, त्रिबिध हुए कल्याण,
जब तन सेवा में धन परोपकार में और मन प्रभु भक्ति में समर्पित हो जाता है तभी जीवन में सच्चे कल्याण और आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त होता है
समागम में सम्मिलित होने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुचारू रूप से की जा रही है सेवा सत्कार और अपनत्व की यही भावना प्रत्येक श्रद्धालु को सम्मान एवं सौहार्द से परिपूर्ण वातावरण का अनुभव कराएगी
निसंदेह संत समागम मात्र एक आयोजन नहीं बल्कि मानवता, समरसता और एकत्व का अनुपम पर्व है विभिन्न संस्कृतियों और परिवेशों से आए श्रद्धालु यहां ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को साकार करते हुए सतगुरु की अमृतवाणी से अपने अंतर्मन को आलोकित करते हैं। प्रेम, शांति और मानव एकता के इस दिव्य महापर्व में प्रत्येक भाई-बहन एवं सज्जन भक्त का हार्दिक स्वागत है

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