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गौचर, ओरण एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण को लेकर देवी सिंह भाटी ने सरकार से की ठोस कार्रवाई की मांग

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

बीकानेर। 12 अगस्त- पूर्व सिंचाई मंत्री एवं वरिष्ठ नेता श्री देवी सिंह भाटी ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, मुख्य सचिव, राजस्व एवं उपनिवेशन मंत्री, प्रमुख शासन सचिव राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग तथा अध्यक्ष, राजस्व मंडल को पत्र लिखकर प्रदेश में गौचर एवं चारागाह भूमि के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। भाटी ने कहा कि विगत कांग्रेस सरकार द्वारा राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 103(ं)(पअ) एवं धारा 92 में जनहित के कार्यों के लिए गोचर भूमि के उपयोग अथवा अवाप्ति से संबंधित प्रावधानों की गलत व्याख्या करते हुए 23 सितंबर 2021 को आदेश जारी किया गया था। इसके बाद स्वायत्त शासन विभाग द्वारा आदेश क्रमांक क.प.8(ग)(66)नियम/डीएलबी/2025/5021 दिनांक 17 अप्रैल 2025 तथा इसी विभाग के स्पष्टीकरण आदेश भूमि/एफ.7(ड)()डीएलबी/2025/7028 दिनांक 1 सितंबर 2025 जारी किए गए। भाटी ने इन आदेशों को प्रदेश में गौचर एवं चारागाह भूमि के संरक्षण की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय बताते हुए इनके विलोपन की मांग की है।

पूर्व मंत्री भाटी ने अपने पत्र में कहा कि राजस्थान में गौचर एवं चारागाह भूमि केवल पशुओं के चरने का स्थान नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पशुपालन, पर्यावरणीय संतुलन तथा वन्यजीव संरक्षण से सीधे जुड़ी हुई है। प्रदेश में लगातार चारागाह भूमि के कम होने से ऊंट, भेड़, बकरी सहित अन्य पशुधन एवं जीव-जंतुओं के लिए प्राकृतिक चराई क्षेत्र सीमित होते जा रहे हैं। इसका प्रतिकूल प्रभाव पशुपालकों की आजीविका, पशुधन तथा पर्यावरणीय संतुलन पर पड़ रहा है।

पूर्व मंत्री भाटी ने राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956, राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 तथा माननीय उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा समय-समय पर दिए गए विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि गौचर, ओरण, तालाब, पायतन, बावड़ी, तलाई सहित पारंपरिक सार्वजनिक एवं पर्यावरणीय महत्व की भूमि को संरक्षित एवं सुरक्षित रखा जाना आवश्यक है। गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार प्रकरण में न्यायालयों द्वारा दिए गए निर्देश भी प्राकृतिक संसाधनों एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण की आवश्यकता को स्पष्ट करते हैं। विकास एवं जनहित के कार्यों के लिए यदि भूमि की आवश्यकता हो तो उपलब्ध अराजीराज अथवा निजी भूमि का उपयोग एवं नियमानुसार अवाप्ति की जानी चाहिए, न कि सदियों से पशुधन एवं पर्यावरण के लिए सुरक्षित चली आ रही गौचर भूमि को समाप्त किया जाए।

भाटी ने हाल ही में माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा वन्य जीव सेवार्थ फाउंडेशन बनाम राजस्थान सरकार प्रकरण में दिए गए निर्णय का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि न्यायालयों की भावना प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीव क्षेत्रों और सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण की रही है। ऐसे में गौचर, चारागाह, ओरण, तालाब, पायतन एवं बावड़ी जैसी भूमि को विकास के नाम पर समाप्त करने की किसी भी व्यवस्था पर गंभीरता से पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

पूर्व सिंचाई मंत्री भाटी ने कहा कि प्रदेश के आमजन में गौचर एवं ओरण भूमि के संरक्षण को लेकर व्यापक चिंता एवं आक्रोश है। ऐसे समय में राज्य सरकार को जनभावनाओं के साथ-साथ पर्यावरण एवं पशुधन संरक्षण के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए ठोस निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पर्यावरण संरक्षण एवं जनभागीदारी के लिए दिए जा रहे संदेश तथा ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे पर्यावरणीय अभियानों की मूल भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण, वन्यजीव, वृक्ष एवं गौवंश सहित समस्त जीव-जगत के संरक्षण के लिए प्राकृतिक एवं सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

पूर्व मंत्री देवी सिंह भाटी ने राज्य सरकार से मांग की है कि विगत कांग्रेस सरकार द्वारा 23 सितंबर 2021 को जारी आदेश, राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग द्वारा 17 अप्रैल 2025 को जारी आदेश तथा 1 सितंबर 2025 को जारी स्पष्टीकरण आदेश की विधि एवं जनहित की दृष्टि से पुनः समीक्षा कर इन्हें विलोपित करने की आवश्यक कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रदेशभर में गौचर, चारागाह, ओरण, तालाब, पायतन, बावड़ी एवं तलाई जैसी भूमि का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पशुधन, पर्यावरण, वन्यजीव एवं ग्रामीण जीवन की परंपरागत व्यवस्था सुरक्षित रह सके।

भाटी ने कहा कि “गौचर और ओरण केवल जमीन के टुकड़े नहीं हैं, बल्कि राजस्थान की पशुधन संस्कृति, पर्यावरणीय विरासत और ग्रामीण जीवन की आधारभूमि हैं। इनके संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।”

सादर – कार्यालय, श्री देवी सिंह भाटी,पूर्व सिंचाई मंत्री !!

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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