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अणुव्रत के छोटे-छोटे संकल्प ही समाज, परिवार और व्यक्ति को देते हैं सही दिशा: कैलाश कोटडिया
बाड़मेर में अणुव्रत समिति की वार्षिक साधारण सभा एवं 'काव्यधारा' गोष्ठी का भव्य आयोजन। आचार्य तुलसी का अणुव्रत आंदोलन पिछले 78 वर्षों से समाज को दिखा रहा है प्रकाश का मार्ग। कवियों ने कविताओं के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति का दिया कड़ा संदेश

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बाड़मेर।अणुव्रत समिति बाड़मेर के तत्वावधान में स्थानीय तेरापंथ भवन के महाश्रमण सभागार में वार्षिक साधारण सभा एवं ‘काव्यधारा’ काव्य गोष्ठी का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम दो मुख्य सत्रों में विभाजित रहा, जिसमें संस्था की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के साथ-साथ साहित्यकारों ने अपनी लेखनी से सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया।
प्रथम सत्र: संयम और संकल्पों का लेखा-जोखा
समिति के उपाध्यक्ष बाबूलाल बोथरा ने बताया कि कार्यक्रम के प्रथम सत्र की शुरुआत ज्योति सिंघवी एवं महिला मंडल के सदस्यों द्वारा “संयम मय जीवन हो…” अणुव्रत गीत की सुमधुर प्रस्तुति के साथ हुई। इसके पश्चात गत बैठक की कार्यवाही का विवरण प्रस्तुत किया गया।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष पवन संखलेचा “नमन” ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में अणुव्रत आचार संहिता का पठन किया और वर्षभर का प्रगति प्रतिवेदन सदन के सामने रखा। वित्त प्रमुख गौतम बोथरा ने संस्था के आय-व्यय का ब्यौरा दिया, जिसे उपस्थित सभी सदस्यों ने ‘ओम अर्हम ध्वनि’ के साथ सर्वसम्मति से स्वीकार किया। बीते एक वर्ष के कार्यकाल की सराहना और अनुमोदना संरक्षक पारसमल गोलेच्छा एवं सलाहकार पुखराज बोकड़िया ने की। प्रथम सत्र का कुशल संचालन ओजस्वी वक्ता गौतम बोथरा द्वारा किया गया।
द्वितीय सत्र: अणुव्रत अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है – डॉ. जहरीला
सोशल मीडिया प्रभारी मुकेश बोथरा ‘भाईपा’ ने जानकारी दी कि द्वितीय सत्र (काव्यधारा कार्यक्रम) का शुभारंभ अणुव्रत मंच के संयोजक डॉ. गोवर्धन सिंह सोढा “जहरीला” के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने युगप्रधान आचार्य तुलसी द्वारा प्रतिपादित अणुव्रत आंदोलन के मानवीय कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि अणुव्रत मनुष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं जाने-माने समाजसेवी कैलाश कोटडिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा: प्राणी मात्र की सेवा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और नशामुक्ति अभियान ही अणुव्रत के मुख्य स्तंभ हैं। छोटे-छोटे अणुव्रत संकल्प आज समाज, परिवार और व्यक्ति को सही दिशा दे रहे हैं। आचार्य तुलसी की साधना अपूर्व थी, जिसका परिणाम है कि यह आंदोलन 78 वर्षों से अविरत चल रहा है। जिसने भी इसे अपनाया, उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव अवश्य आया है।
विशिष्ट अतिथि एवं तेरापंथ समाज के अध्यक्ष गौतम चंद भंसाली ने अणुव्रत समिति बाड़मेर के कार्यों की सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की और *”बदले युग की धारा, अणुव्रतों के द्वारा”* का उद्घोष किया। काव्यधारा गोष्ठी: कविताओं के जरिए नशामुक्ति और पर्यावरण का संदेश
काव्यधारा सत्र की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोवर्धन सिंह सोढा ‘जहरीला’ ने अपनी बुलंद आवाज में पर्यावरण चेतना जगाती कविता *”पर्यावरण बढ़िया रहे घर-घर पेड़ लगाओ जी”* पेश की। इसके बाद आमंत्रित कवियों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं:
गौतम चमन (अध्यक्ष, राष्ट्रीय कवि संगम):जब से नशे से यारी की, पूरे शहर में धीरे-धीरे उधारी ली। ममता शर्मा “तारिणी अध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य परिषद छवि बना दो ऐसी, पथ बना दो हजारों का। उमर फारूक गौरी (वरिष्ठ साहित्यकार)रहती है जब तक चमन में बहारें, बन जाती हैं आशियानों की कतारें। कवि गणेश केला पानी की हर बूंद अमृत है, पानी हर किसी की जरूरत है। पिंकी जैन (नवोदित कवियत्री)”नशा वो कहर है जो इंसान को खाए, अपने संग पूरे परिवार को डुबाए।
नीलम जैन “नीलजीत”:नामुमकिन को मुमकिन करने की अणुव्रत ने है ठानी। दिलीप राठी: मिट्टी की सोंधी खुशबू हुई गायब, लगता है मेरा शहर आ गया। गौतम बोथरा जिसने नशे को गले लगाया उसका घर बर्बाद हुआ, अणुव्रत के छोटे-छोटे संकल्प बदलाव लाएंगे।
मेघराज मेघ युवा कवि:नशे से रहना दूर, हर नशा एक जहर है, शरीर पर बरसता कहर है।गिरधारी लाल सिंघवी ने कुसंस्कार को दूर कर सुसंस्कार अपनाये, घर घर अणुव्रत की अलख जगाए मुक्तक प्रस्तुत किया.
इस शानदार और चेतना जगाने वाले काव्य सत्र का सफल संचालन सह-मंत्री नीलम जैन “नीलजीत” द्वारा किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रबुद्धजन, साहित्यप्रेमी और समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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