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धर्मनिष्ठ श्रावक सुरेश पगारिया को भावभीनी श्रद्धांजलि, जैनाचार्य प्रशांतशेखरसूरी बोले– व्यक्ति चला जाता है, सुकृत कार्य हमेशा याद रहते हैं

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जोधपुर। धर्मनिष्ठ श्रावक एवं समाजसेवी सुरेश पगारिया के आकस्मिक निधन पर जैन समाज में शोक की लहर है। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके सेवा, धर्मनिष्ठा और समाज के प्रति समर्पण को याद किया।
श्री महावीर शासन स्थापना महोत्सव समिति के राष्ट्रीय महामंत्री धनराज विनायकिया एवं अनिल मेहता ने संयुक्त रूप से बताया कि बेंगलुरु में सुरेश पगारिया के आकस्मिक निधन के बाद भैरूबाग जैन तीर्थ में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान परमात्मा के समक्ष स्तुति, आत्मशांति की प्रार्थना एवं नवकार महामंत्र का स्मरण किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए जैनाचार्य प्रशांतशेखरसूरी ने कहा कि “व्यक्ति इस संसार से चला जाता है, लेकिन उसके किए हुए सुकृत कार्य सदैव लोगों के हृदय में जीवित रहते हैं। सुरेश पगारिया ऐसे ही व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने सेवा भाव, मिलनसार स्वभाव और धर्मनिष्ठ जीवन से समाज में विशेष पहचान बनाई। उनके निधन से जैन समाज ने एक समर्पित श्रावक को खो दिया है।” उन्होंने परिवारजनों से उनके आदर्शों एवं पदचिह्नों पर चलने का आग्रह भी किया।
श्रद्धांजलि सभा में यह भी उल्लेख किया गया कि सुरेश पगारिया की तीनों बहनें—प्रफुल्लप्रभाश्री, कुसुमप्रभाश्री एवं वैराग्य पूर्णाश्री—संयम मार्ग अपनाकर जिन शासन की सेवा एवं आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर हैं।
कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाज के गणमान्य लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर तथा तीन बार नवकार महामंत्र का स्मरण कर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अंत में चंद्रप्रकाश रक्षित दीक्षित एवं गौतम पगारिया ने सभी उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।

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