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महिलाओं में ऑस्टियोपोरॉसिस : आयुर्वेदिक दृष्टिकोण और उपचार – डॉ नवजोत सिंह

बस्ती से वेदान्त सिंह
लखनऊ (वेदांत टाइम्स/बस्ती टाइम्स 24 न्यूज)। महिलाओं में बढ़ती आयु के साथ हड्डियों का कमजोर होना एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है, जिसे चिकित्सा विज्ञान में ऑस्टियोपोरॉसिस कहा जाता है। आयुर्वेद में इसे “अस्थिक्षय” या “अस्थिसौक्ष्म्य” के नाम से जाना जाता है। यह जानकारी डॉ. नवजोत सिंह, बी.एन.वाई.एस., द पॉजिटिव हीलिंग, संकल्प योग वैलनेस सेंटर, लखनऊ द्वारा दी गई।
डॉ. नवजोत सिंह के अनुसार आयुर्वेद में ऑस्टियोपोरॉसिस का मुख्य कारण वात दोष की वृद्धि, अस्थि धातु की कमजोरी तथा अग्नि (पाचन शक्ति) का मंद होना माना गया है। विशेष रूप से रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज़) के बाद महिलाओं में एस्टरोजन हार्मोन की कमी से वात दोष बढ़ जाता है, जिससे हड्डियों का क्षय प्रारंभ हो जाता है। आयुर्वेद में कहा गया है—
“वातो हि सर्वदेहेषु वृद्धिः क्षयश्च हानिकृत्।”
अर्थात शरीर में जहाँ भी वात की वृद्धि होती है, वहाँ क्षय और दुर्बलता उत्पन्न होती है।
🔹 अस्थिक्षय के प्रमुख लक्षण
हड्डियों में दर्द या जकड़न, पीठ या रीढ़ में झुकाव, छोटी चोट में हड्डी टूटना, जोड़ों से आवाज़ आना, तथा शरीर में लगातार कमजोरी और थकान इसके सामान्य लक्षण हैं।
🔹 आयुर्वेदिक उपचार एवं औषधियाँ
आयुर्वेद में अस्थि धातु को पुष्ट करने हेतु अश्वगंधा, शतावरी, योगराज गुग्गुल, त्रिफला गुग्गुल, तथा लक्षादी गुग्गुल का विशेष महत्व बताया गया है। इसके साथ ही प्रवाल पिष्टी, गोदंती भस्म और शंख भस्म को कैल्शियम के प्राकृतिक स्रोत के रूप में उपयोगी माना गया है।
🔹 आहार और जीवनशैली
दूध, घी, तिल, बादाम, मूंग, हरी सब्जियाँ, अंजीर, खजूर और मुनक्का जैसे पौष्टिक आहार अस्थि स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। अधिक नमक, चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक, धूम्रपान और शराब से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
🔹 योग, प्राणायाम और सूर्यस्नान
ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन, भुजंगासन तथा सूर्य नमस्कार जैसे योगासन हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं। अनुलोम–विलोम, भ्रामरी और नाड़ी शोधन प्राणायाम वात दोष को संतुलित करने में सहायक हैं। प्रतिदिन कम से कम 20 मिनट सूर्यस्नान से शरीर को प्राकृतिक विटामिन-D प्राप्त होता है, जो हड्डियों के लिए आवश्यक है।
🔹 पंचकर्म चिकित्सा
वात दोष शमन हेतु अभ्यंग, स्वेदन और बस्ती जैसी पंचकर्म विधियाँ अत्यंत प्रभावी मानी गई हैं। वातशामक बस्ती द्वारा अस्थि घनता बढ़ाने में सहायता मिलती है।
🔹 निष्कर्ष
आयुर्वेद के अनुसार वात, पित्त और कफ का संतुलन, उचित आहार, सशक्त पाचन शक्ति तथा अनुशासित जीवनशैली ही स्वस्थ और मजबूत हड्डियों की कुंजी है। समय रहते योग, सूर्यस्नान और आयुर्वेदिक उपचार अपनाकर ऑस्टियोपोरॉसिस को रोका और प्रारंभिक अवस्था में नियंत्रित किया जा सकता है।
🌿 संदेश:
“वात नियंत्रित हो, आहार संतुलित हो और जीवनशैली अनुशासित हो —
तो अस्थि धातु सुदृढ़ होकर जीवन को समर्थ बनाती है।”

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