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“वृक्षों का सम्मेलन” – पर्यावरण संरक्षण की ओर एक मार्मिक संदेश

बस्ती से वेदान्त सिंह

 

 

बस्ती, 31 जुलाई 2025:
पर्यावरण संरक्षण और वृक्षों के महत्व को उजागर करती एक मार्मिक कथा “वृक्षों का सम्मेलन” आजकल सामाजिक मंचों पर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। डॉ. शोभित कुमार श्रीवास्तव “डॉ टैक्सो” द्वारा लिखित यह रचना न केवल भावनाओं को झकझोरती है, बल्कि एक गंभीर संदेश भी देती है — वृक्षों की पीड़ा और मानव की जिम्मेदारी।

कथा के अनुसार, धरती के सभी वृक्ष हिमालय की गोद में एकत्र होते हैं और एक विशेष सम्मेलन आयोजित करते हैं। इस सम्मेलन का विषय था — “मानव की ओर से हमारी पीड़ा”। नीम, पीपल, बबूल, आम, सागौन जैसे वृक्ष अपने-अपने अनुभव साझा करते हैं, जिनमें उन्होंने मानवता को बहुत कुछ दिया लेकिन बदले में उन्हें केवल कटाव, उपेक्षा और विनाश मिला।

इस भावुक क्षण में एक नन्हा पौधा बोलता है — “क्या मुझे जीने का हक़ मिलेगा?” और तभी आकाशवाणी होती है — “जब तक एक भी संवेदनशील मानव शेष है, तुम जीवित रहोगे।” कहानी का अंत एक बच्चे द्वारा पौधा लगाने के साथ होता है, जो यह वादा करता है कि वह वृक्षों को बचाएगा और बढ़ाएगा।

यह कथा आज के दौर में एक अत्यंत प्रासंगिक संदेश देती है कि अगर अभी नहीं चेते, तो भविष्य में हरियाली की यह संपदा केवल कहानियों में ही रह जाएगी।

प्रमुख संदेश:

वृक्ष मानवता को निस्वार्थ सेवाएं देते हैं।

अंधाधुंध कटाई से प्रकृति की आत्मा आहत हो रही है।

बच्चों और नई पीढ़ी को वृक्षारोपण और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने की ज़रूरत है।

निष्कर्ष:
“वृक्षों का सम्मेलन” सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक चेतावनी है — समय रहते अगर हम नहीं जागे तो प्रकृति का यह मौन क्रंदन एक दिन विकराल रूप ले लेगा।

Viyasmani Tripaathi

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