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बीडीओं विक्रमजोत की लापरवाही से ग्राम पंचायत बटौली में नही संचालित हो रहा सार्वजनिक शौचालय

संवाददाता सचिन कुमार कसौधन बस्ती
बस्ती (विक्रमजोत )- खण्ड विकास अधिकारी विक्रमजोत की लापरवाही / उदासीनता से ग्राम पंचायत बटौली में सार्वजनिक शौचालय का संचालन नही हो पा रहा है । वर्तमान प्रधान का कार्यकाल 2 वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी ग्राम प्रधान हृदयराम और सचिव राम दरश टस मस नही हो रहे हैं । ग्राम पंचायत बटौली ओडीएफ घोषित है । जिम्मेदार अधिकारियों ने कागज में ग्राम पंचायत ओडीएफ घोषित करके सरकारी धन का बन्दरबांट कर लिया गया है ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तत्कालीन सचिव ने ग्राम पंचायत में भ्रष्टाचार का खूब खेल खेला था । सैकड़ों व्यक्तिगत शौचालय का पैसा फर्म के नाम फर्जी भुगतान प्राप्त कर के अपनी जेब तो गर्म कर लिया था लेकिन धरातल पर व्यक्तिगत शौचालय निर्माण कार्य शुरू ही नही हुआ तो पूर्ण कैसे होगा ? ग्रामीणों की शिकायत पर तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी शिवशंकर सिंह ने जांच एवं कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करके मामले को रफा दफा कर दिया था । सार्वजनिक शौचालय निर्माण कार्य तो लगभग पूर्ण है लेकिन संचालित नही हो पा रहा है जिसका मुख्य कारण तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तत्कालीन सचिव द्वारा सार्वजनिक शौचालय का धन निकाल लेना है । तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तत्कालीन सचिव ने सार्वजनिक शौचालय का सम्पूर्ण धन तो निकाल लिया गया लेकिन निर्माण कार्य अधूरा एवं मानक विहीन है । वर्तमान ग्राम प्रधान हृदयराम का मतलब है कि जब तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तत्कालीन सचिव ने सार्वजनिक शौचालय का सम्पूर्ण धन निकाल लेने के बाद भी संचालित नही करायें थे तो हम क्यों संचालित करायें ? उच्च अधिकारी की मिलीभगत से ग्राम पंचायत बटौली में सार्वजनिक शौचालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है । इस सम्बन्ध में ग्राम प्रधान हृदयराम ने बताया कि हमने सार्वजानिक शौचालय निर्माण का कोई धन नही निकाला है । तत्कालीन ग्राम प्रधान एवं तत्कालीन सचिव ने कहा था कि हम दोनों लोगों ने सार्वजनिक शौचालय का सम्पूर्ण धन निकाला है तो अधूरा कार्य पूर्ण करा देगें लेकिन ग्राम प्रधान एवं सचिव ने निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया । अभी तक केयर टेकर की भी नियुक्ति नही हो पाई है यदि केयर टेकर की नियुक्ति हो गई होती तो एक गरीब महिला को रोजगार मिल जाता एवं एक परिवार का मानदेय से भरण पोषण होता । उक्त प्रकरण में खण्ड विकास अधिकारी विक्रमजोत से जानकारी के लिए फोन के माध्यम से सम्पर्क किया तो खण्ड विकास अधिकारी ने मीडिया के काल को रिसीव नहीं किया ।

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