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हमें विश्वास के साथ निस्वार्थ भक्ति करनी चाहिए, यही मानव जीवन का परम धर्म- आचार्य बजरंग शास्त्री

ब्यूरो चीफ सतीश कुमार महेंद्रगढ़ हरियाणा
*नारनौल टुडे न्यूज़*
नारनौल के समीप गांव खटोंटी में आयोजित संगीतमय श्री मदभागवत कथा कें तृतीय दिवस पर भागवत आचार्य पंडित बजरंग शास्त्री जी ने भागवत कथा में बताया की श्रीमद भागवत साक्षात नारायण का स्वरूप है और मुक्ति प्रदाता है और भागवत के आरम्भ में सबसे पहले सत्य को प्रणाम किया गया है, क्योंकि सत्य में ही राम है, सत्य में ही कृष्ण है और सत्य में ही शिव है। इसलिये लिखा गया है,सत्यम-शिवम-सुंदरम
*आचार्य जी ने बताया की घर परिवार का पालन पोषण करना हमारा धर्म है, लेकिन हमारी हर एक श्वास में प्रभु का नाम स्मरण होता रहे, यही मानव जीवन का परम धर्म है। हम सभी को विश्वास के साथ निस्वार्थ भक्ति ही करनी चाहिये, क्योंकि यही मानव जीवन का परम धर्म है । भागवत में मुख्य रूप से भगवान के 24 अवतारों का वर्णन किया गया है।*
इसके बाद आचार्य जी ने व्यास जी के जन्म , शुकदेव जन्म और परीक्षित जी के जन्म की,और कलियुग आगमन, कुंती स्तुति , भीष्म पितामह द्वारा देह त्याग , राजा परीक्षित को संत के श्राप और शुकदेव आगमन की कथा सुनाई और इसके उपरांत शुकदेव द्वारा भगवान नारायण द्वारा बह्मा को चतु:श्लोकि भागवत उपदेश किया और बताया की किस प्रकार भगवान वराह रूप धारण किया और हिरण्याक्ष का उद्धार किया और रसातल मे गई पृथ्वी को लेकर आये।
*आचार्य जी ने बताया की भगवान नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि वर्णन किया। उसके उपरांत ब्रह्मा जी ने अपने शरीर से सृष्टि के पहले पुरुष मनु और स्त्री शतरूपा को महारानी को प्रकट किया और ।*
इसके बाद नरसिंह अवतार की सुंदर कथा वर्णन करते हुए बजरंग शास्त्री ने बताया की भगवान अपने भक्तो के लिये कुछ भी करने के लिये तैयार ही जाते है । भगवान के परम भक्त प्रहलाद को जब दुष्ट हिरण्यकश्यप ने बड़ा कष्ट दिया और अनेक प्रयत्न द्वारा प्रहलाद को मारने का प्रयत्न किया, लेकिन प्रहलाद का बाल भी बाँका नही कर पाया, क्योंकि कहते है की जाको राखे साईया मार सके ना कोय और बाल ना बाकौ कर सके जो जग बैरी होय “जिसकी भगवान रक्षा करते है उसका कोई कुछ भी नही बिगाड़ सकता।
*कथा में हिरण्यकश्यप और नरसिंह तथा प्रहलाद की सुंदर झांकी तथा कथा का वर्णन किया तथा बताया की भगवान अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिये आधे नर और आधे सिंह के रूप में नरसिंह रूप धारण कर प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप को मारकर प्रहलाद की रक्षा की। आचार्य जी ने बताया की भगवान नारायण की आज्ञा से ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण आरम्भ किया और सर्वप्रथम दस प्रकार की सृष्टि का निर्माण किया। उसके उपरांत ब्रह्मा जी ने अपने शरीर से सृष्टि के पहले पुरुष मनु और स्त्री शतरूपा को महारानी को प्रकट किया और इन्ही के द्वारा आगे पूरी सृष्टि कि रचना हुई हम सभी लोग मनु कि संतान है। इसलिये हम सभी मानव कहलाते है। इन्ही मनु जी के यहा पर तीन पुत्री आकुति , देवहूति, प्रसूति , और दो पुत्र प्रियव्रत और उत्तानपाद का जन्म हुआ और इन्ही से सृष्टि का विस्तार हुआ ।*
आचार्य जी ने भागवत कथा मे कर्दम देवहूति संवाद , कपिल देवहूति संवाद सुनाया । सती चरित्र का वर्णन करते हुए बताया की जहाँ किसी जगह पर जाने पर अपमान हो आदर ना हो तो ऐसी जगह पर बिना बुलाये नही जाना चाहिए । माता सती बिना बुलाये पिता दक्ष के यज्ञ में गई और वहाँ पर माता सती को अपना और शंकर भगवान का अपमान सहन नही हुआ और योग अग्नि के द्वारा अपने शरीर को जलाकर भस्म कर दिया।
*कथा के अंत में आचार्य जी ने ध्रुव जी की सुंदर कथा का बडा ही मार्मिक वर्णन किया है जिसके सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए कथा के अंत में भगवान नारायण और ध्रुव जी की सुंदर झांकी का दर्शन भी करवाया गया कार्यक्रम के बारे जानकारी देते हुए आयोजक पिंकी शर्मा ने बताया कि कथा प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे तक भगवताचार्य पं.बजरंग शास्त्री जी महाराज अपने मुखारबिंद से भक्तो को भागवत कथा की गंगा मे आनंद दिलाते है जिसमे सभी सभी धर्म प्रेमी बंधुओ से इस धार्मिक आयोजन मे भागवत की ज्ञान गंगा में सपरिवार आकर कर भाग लेने की अपील की।*
कथा आयोजक ने बताया कि जो धर्म प्रेमी बंधु किसी कारण से इस कथा में ना पहुंच पाए तो वह यूट्यूब चैनल आचार्य बजरंग शास्त्री जी पर इस कथा का लाइव प्रसारण देख सकते हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से पिंकी शर्मा, डॉक्टर लक्ष्मीनारायण , कैलाश , मोनिका शर्मा, मंजु शर्मा ,अन्नु शर्मा , संगीता, कृष्णा, पूजा, सपना , प्रबीन शर्मा , नवीन, कमल , मनीष, अनिल शर्मा और पूनम शर्मा, सोमदेव शर्मा, लीलावती देवी सहित सैकडों की संख्या में मातायें एवम बहनो सहित काफी संख्या में शहर के अनेक गणमान्य लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।

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