सांस्कृतिक अहीरवाल सिहमा ईकाई की एक बैठक सिहमा स्थित बाबा खेतानाथ मन्दिर परिसर में संपन्न हुई ।इस बैठक सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री मुख्य वक्ता के रुप में उपस्थित थे । बैठक में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सांस्कृतिक अहीरवाल के निदेशक सत्यव्रत शास्त्री ने कहा की हमारी संस्कृति के प्रति उपेक्षा भाव हम सब के द्वारा किया गया उसके कारण से ही आज यह संस्कृति अपनी पहचान होती जा रही है यदि अहीरवाल संस्कृति को जागृत करना है तो उसके लिए हम सबको स्वयं प्रेरणा से आगे आना होगा। देश के 1000 साल की गुलामी के दौरान अनेक संस्कृतियां नष्ट हुई लेकिन हमारे पूर्वजों के द्वारा इसे संरक्षित करके हमारे हाथों में सौंपा था परंतु वर्तमान पीढ़ी के आलस्य और उपेक्षा भाव के कारण से हमने अपनी प्राचीन परंपराओं को महत्व देना बंद कर दिया। इसी कारण से आने वाली पीढ़ी इससे मृतप्राय समझकर अंगीकार करने में हिचकीचा रही है। सांस्कृतिक अहीरवाल ने इस ओर ध्यान दिया और लगभग 2300 गांव में से 1100 गांव का इतिहास लेखन का काम पूर्ण किया गया। यह कार्य अहीरवाल संस्कृति के स्थापना के 12 प्रकल्पों में एक प्रकल्प है इसके बाद अगले प्रकल्पों पर कार्य होगा। आज उपस्थित लोगों को सत्यव्रत शास्त्री ने 4 बिंदुओं पर जानकारी और संग्रहित करने के लिए आह्वान किया जिसमें पुराने वैद्य पशु या मनुष्य, पुराने न्याय व्यवस्था को संभालने वाले न्याय पंच, गांव में सामाजिक कार्यों के लिए उपयोगी भवनों में सहयोग करने वाले व्यक्तियों के नाम तथा पुस्तक लेखकों के योगदान को शामिल किया जाना है जिस पर उपस्थित सभी लोगों ने इस बात को स्वीकार किया और इस महीने के अंत तक इस काम को पूर्ण कर अपने गांव का इतिहास लेखन का काम पूरा करने का संकल्प दोहराया ।आज की बैठक में जईतपआल जी अटाली, ओमप्रकाश छापड़ा,नरेश पूर्व सरपंच सिहमा, सुबेसिंह पूर्व सरपंच सिहमा, ओमप्रकाश यादव सुराणा,प्रविन्द्र सुराणा,शिवदयाल अटाली,अशोक शर्मा सिहमा, विजयसिंह खामपुर,महेश शर्मा खामपुर,रोहतास पंच डेरोली अहीर,रोहतास यादव डेरोली, महेन्द्रसिंह मेई,दिनेश कुमार मेई,सतीश शहरपुर, कैप्टन रामकिशन यादव शहरपुर, रामवतार यादव खत्री पुर,शभाचंद दुबलाना,कैलास जांगिड़ मित्रपुरा देवदत्त सिहमा, करणसिंह सिहमा उपस्थित रहे।