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राजस्थान : व्यावसायिक प्रशिक्षकों की पुनः नियुक्ति को लेकर उठी मांग

बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी
राज्य के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों ने एक बार फिर अपनी पुनः नियुक्ति की मांग तेज कर दी है। प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “स्किल इंडिया” विज़न को साकार करने के लिए राजस्थान सरकार ने शिक्षा सत्र 2024-25 में 2903 राजकीय विद्यालयों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति सेवाप्रदाता एजेंसियों के माध्यम से की थी।
प्रदेशभर में करीब 2527 प्रशिक्षकों को मार्च 2025 में नियुक्त किया गया था, लेकिन मात्र तीन माह बाद ही 13 जून 2025 को सरकार ने एजेंसी के साथ हुआ अनुबंध निरस्त कर दिया। इससे सभी प्रशिक्षक अचानक बेरोजगार हो गए।
प्रशिक्षकों का आरोप है कि नियुक्ति के दौरान उन्होंने ग्रीष्मकालीन अवकाश में डोर-टू-डोर सर्वे, स्कीम का प्रचार-प्रसार और ड्रॉपआउट विद्यार्थियों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मानदेय भी नहीं दिया गया।
अनुबंध निरस्ती के तीन माह बीत जाने के बाद भी न तो पुनः संविदा की गई और न ही किसी प्रशिक्षण कार्य के लिए बुलाया गया। प्रशिक्षकों का कहना है कि वे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से डिग्रीधारी हैं और वर्षों का व्यावसायिक अनुभव रखते हैं, ऐसे में बिना जांच-पड़ताल उन्हें हटाना न्यायसंगत नहीं है।
प्रशिक्षकों ने जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से राज्य सरकार से आग्रह किया है कि विद्यार्थियों के भविष्य और कौशल शिक्षा की निरंतरता को ध्यान में रखते हुए उन्हें दोबारा विद्यालयों में नियोजित किया जाए, ताकि व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले लाखों छात्र-छात्राएँ कौशल प्रशिक्षण से वंचित न रह जाएं।
👉 यह मुद्दा अब विधानसभा प्रक्रिया व कार्य निष्पादन नियम 131 के अंतर्गत भी उठाए जाने की तैयारी की जा रही है।

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