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एनआरसीसी द्वारा ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत कोटड़ी गांव में कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित

बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी

 

एनआरसीसी द्वारा ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ के अंतर्गत कोटड़ी गांव में कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित

भाकृअनुप–राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र (एनआरसीसी), बीकानेर द्वारा ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ (29 मई–12 जून, 2025) के तहत दिनांक 06 जून 2025 को बीकानेर जिले के कोटड़ी गांव में कृषक–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अनुसूचित जाति उप–योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 103 महिला एवं पुरुष पशुपालकों/किसानों ने भाग लिया।

कार्यक्रम के दौरान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. समर कुमार घोरूई ने पशुपालकों से संवाद करते हुए बताया कि पशुपालन को लाभकारी बनाने हेतु आहार प्रबंधन, खनिज मिश्रण, स्वास्थ्य सुरक्षा आदि सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संतुलित व पर्याप्त आहार से पशुओं की वृद्धि में तेजी आती है जिससे कम समय में आर्थिक लाभ संभव होता है।

उन्होंने ऊँट को बहुउद्देशीय पशु बताते हुए कहा कि यह न केवल भार वहन एवं कृषि कार्यों में सहायक है, बल्कि इसके दूध की औषधीय विशेषताएँ, पर्यटन क्षेत्र में उपयोगिता और ऊंटों से एंटी स्नेक वेनम का उत्पादन जैसी पहलें इसकी महत्ता को और बढ़ा रही हैं।

अभियान के नोडल अधिकारी डॉ. वेद प्रकाश ने किसानों को कृषि के साथ–साथ पशुपालन अपनाने के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि ऊँट, भेड़ एवं बकरी जैसे पशु कठिन जलवायु में भी पालन योग्य हैं तथा आय का एक सशक्त स्रोत बन सकते हैं। उन्होंने ऊँटों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए इसके संरक्षण की आवश्यकता बताई और पशुपालकों से एनआरसीसी से जुड़कर नस्ल सुधार, दुग्ध व्यवसाय एवं उष्ट्र पर्यटन से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के मार्गदर्शक, केंद्र के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पूनिया के निर्देशन में आयोजित इस संवाद में वैज्ञानिकों की टीम के माध्‍यम से किसानों तक अपनी बात पहुंचाते हुए उन्‍होंने कहा कि ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और नवाचारों से जोड़ना है, जिससे कृषि आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बन सके। वैज्ञानिक–कृषक संवाद के माध्यम से जहां किसानों को तकनीकी लाभ मिलेगा, वहीं वैज्ञानिकों को भी शोध की नई दिशाएं मिलेंगी।

केंद्र के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. काशी नाथ ने नियमित जांच, टीकाकरण और उचित रखरखाव के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्वस्थ पशुधन ही किसान की आय बढ़ाने का आधार है।

कार्यक्रम के फीडबैक सत्र में उपस्थित पशुपालकों ने गाय, ऊँट, बकरी एवं भेड़ के व्ययवासिक पालन तथा सरकारी योजनाओं के उचित जानकारी और लाभ हेतु स्वयं सहायता समूह /किसान उत्पादक संगठन के निर्माण के लिए जरूरी सहायता और जानकारी की मांग रखी।

इस अवसर पर श्री आशीष पित्ती, श्री मनजीत सिंह, श्री राजेश चौधरी आदि ने किसानों के पंजीयन, दवा एवं पशु आहार तथा कृषि में सहायक विभिन्‍न संसाधनों आदि के वितरण जैसे कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

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