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गर्भवती व धात्री महिलाओं को मिले दस हजार रुपए की सहायता – युवा मंच

आंगनबाड़ी केंद्र को मजबूत कर दूर किया जाए कुपोषण 

ब्यूरो चीफ राम सुदीन सोनभद्र

 

सोनभद्र। जनपद में 20 फ़ीसदी गर्भवती महिलाओं के हाई रिस्क श्रेणी में होने और बड़ी संख्या में एनीमिक होने के आए आंकड़ों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए युवा मंच ने सरकार से गर्भवती व धात्री महिलाओं को पोषाहार के लिए 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने और आईसीडीएस के आंगनबाड़ी केन्द्रों को कुपोषण दूर करने के लिए मजबूत करने की मांग की है।

युवा मंच जिला संयोजक सविता गोंड ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि जनपद में अप्रैल 2024 से जनवरी 2025 तक 54249 गर्भवती महिलाओं ने पंजीकरण कराया था, जिसमें से 10294 में गर्भवती महिलाएं उच्च जोखिम की श्रेणी में है। इसमें सर्वाधिक महिलाएं 2061 म्योरपुर की है। इसी प्रकार 3594 गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर गंभीर रूप से बेहद कम है और इसमें भी सर्वाधिक संख्या म्योरपुर की 888 है।

         मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के बावजूद जिले में यह भयावह स्थिति है। पत्र में कहा गया कि गरीबी, बेरोजगारी और भीषण महंगाई के कारण लोगों की आमदनी बेहद कम है और लोग आवश्यक पुष्ट भोजन नहीं खा पा रहे हैं। इसलिए आवश्यकता है कि उन्हें पौष्टिक भोजन देने की सलाह देने के साथ कम से कम 10 हजार रुपए गर्भवती व धात्री महिलाओं को सरकारी सहायता दी जाए ताकि वह कुपोषण से मुक्त हो सके।

            कहा कि जनपद में आमतौर पर लोगों में हीमोग्लोबिन का स्तर बेहद कम रहता है।इसलिए आंगनवाड़ी पर केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त पोषण आहार महिलाओं और बच्चों को दिया जाए। पत्र में कहा गया कि जिला अस्पताल को छोड़कर जनपद में किसी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं है। घोरावल, चोपन व म्योरपुर में महिला डॉक्टर और अन्य जगह एएनएम से काम चलाया जा रहा है। मांग की गई कि सर्वाधिक पिछड़े जनपद सोनभद्र की हर सीएचसी पर स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति की जाए।

 

Viyasmani Tripaathi

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