बस्ती ( विक्रमजोत ) – सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विक्रमजोत अधीक्षक डा0 आसिफ फारुकी चुनाव आयोग पर भारी पड़ रहे हैं । डा0 आसिफ फारुकी शासनादेश के विरुद्ध 13 वर्षों से लगातार सीएचसी विक्रमजोत पर तैनात है। तेज तर्रार जिलाधिकारी / जिला निर्वाचन अधिकारी आंद्रा वामसी भी डा0 आसिफ फारुकी के स्थानांतरण में रुचि नहीं ले रहे हैं ।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सीएचसी विक्रमजोत पर अधीक्षक डा0 आसिफ फारुकी वर्ष 2010 से ही तैनात है और डा0 आसिफ फारुकी का स्थानांतरण बीच में एक बार हुआ था लेकिन स्वास्थ्य विभाग में मोटी रकम देकर स्थानांतरण निरस्त करवा दिया था । 13 वर्षों से लगातार तैनात डा0 आसिफ फारुकी के खिलाफ स्थानांतरण के लिए शिकायत भी शासन में हुआ था लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने जांच एवं कार्रवाई के नाम लीपापोती कर मामले को रफा – दफा कर दिया कर दिया जाता हैं । वर्तमान समय में लोक सभा चुनाव की प्रक्रिया चल रही है । जिसमें 03 वर्षों से अधिक समय से प्रत्येक कार्यालयों में तैनात अधिकारियों / कर्मचारियों का स्थानांतरण नीति के अनुसार स्थानांतरण किया जा रहा है । ताकि लोक सभा चुनाव शान्तिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके । लेकिन डा0 आसिफ फारुकी पर स्वास्थ्य विभाग समेत जिला निर्वाचन अधिकारी / जिलाधिकारी के मिलीभगत से स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाई जा रही है जिसको लेकर पूरे प्रदेश में तरह – तरह की चर्चाएं चल रही है कि चुनावी सीजन में जब चुनाव आयोग डा0 आसिफी फारुकी का स्थानांतरण नीति के अनुसार स्थानांतरण करने में पूरी तरह फेल है तो शान्तिपूर्ण ढंग से लोक सभा चुनाव कैसे सम्पन्न होगा ?
नाम न छापने की शर्त पर कुछ क्षेत्रवासियों ने बताया कि डा0 आसिफ फारुकी 13 वर्षों से सीएचसी विक्रमजोत पर लगातार तैनात होने के कारण एवं व्यक्तिगत नर्सिंग होम होने के कारण कई हजार वोट प्रभावित कर सकते हैं क्योंकि डाo आसिफ फारुकी का हर जाति धर्म के लोगों से पहचान बन गई है । अब देखना है कि डा0 आसिफ फारुकी का स्थानांतरण नीति के आधार पर स्थानांतरण हो पाता है कि खुले आम स्थानांतरण नीति की धज्जियां उड़ाने में जिला निर्वाचन अधिकारी / जिलाधिकारी सहयोग की भूमिका निभायेंगें ।