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18 जनवरी 2027 को गुरुचरणों में दीक्षित होगा जहान बेताला
प्रवीण और नताशा बेताला का इकलौता पुत्र अपनाएगा संयम का मार्ग, आचार्य श्री महाश्रमणजी लाडनूं में कराएंगे दीक्षा

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा।
जैन धर्म में संयम, त्याग और वैराग्य का मार्ग आत्मकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया है। इसी मार्ग पर अग्रसर होते हुए बोरावड़ राजस्थान निवासी एवं सूरत प्रवासी प्रवीण बेताला और नताशा बेताला का इकलौता पुत्र जहान बेताला आगामी 18 जनवरी 2027 को जैन धर्म की दीक्षा ग्रहण करेगा। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य श्री महाश्रमणजी के करकमलों से लाडनूं स्थित जैन विश्वभारती प्रांगण में जहान दीक्षित होकर संयम जीवन में प्रवेश करेगा।
अल्पायु में वैराग्य भाव अपनाकर दीक्षा की ओर बढ़ते जहान के निर्णय को लेकर परिवार एवं श्रावक-श्राविका समाज में विशेष उत्साह है।
12 वर्ष की उम्र से मन में जागा वैराग्य भाव
दीक्षार्थी जहान के जीवन में लगभग 12 वर्ष की उम्र से ही वैराग्य की भावना विकसित होने लगी थी। सांसारिक जीवन से आगे बढ़कर आत्मकल्याण की दिशा में कदम बढ़ाने की उसकी भावना निरंतर प्रबल होती गई। जहान का कहना है कि वह अपने आत्मकल्याण के उद्देश्य से संयम के इस मार्ग पर प्रस्थान कर रहा है। दीक्षा के माध्यम से वह अपने जीवन को आध्यात्मिक साधना, त्याग और आत्मानुशासन के लिए समर्पित करना चाहता है।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी के मार्गदर्शन ने बढ़ाया हौसला
बालोतरा में चातुर्मास कर रही प्रोफेसर साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के दर्शन के लिए दीक्षार्थी जहान पहुंचा। इस दौरान उसने साध्वी श्री के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि दीक्षा के मार्ग पर आगे बढ़ने का हौसला बढ़ाने तथा उसके माता-पिता को समझाकर उसे गुरुचरणों तक पहुंचाने में प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञाजी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
जहान ने कहा कि वह साध्वी श्री के इस सहयोग और मार्गदर्शन के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगा। उनके स्नेह, प्रेरणा और आध्यात्मिक मार्गदर्शन ने उसके संकल्प को मजबूती प्रदान की है।
परिवार ने बालोतरा के श्रावक-श्राविका परिवार को दिया निमंत्रण
दीक्षार्थी जहान की सहोदर बहन जियाना तथा पिता प्रवीण बेताला और माता नताशा बेताला ने आगामी 18 जनवरी 2027 को होने वाले दीक्षा समारोह में शामिल होने के लिए बालोतरा के समस्त श्रावक-श्राविका परिवार को हार्दिक आमंत्रण दिया है। परिवार ने इस आध्यात्मिक अवसर पर समाजजनों की उपस्थिति एवं मंगलकामनाओं की अपेक्षा जताई है।
लाडनूं स्थित जैन विश्वभारती प्रांगण में आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में संपन्न होने वाला यह दीक्षा समारोह जहान के जीवन की नई आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। एक ओर जहां परिवार के लिए यह अवसर भावनात्मक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है, वहीं दूसरी ओर जहान का संयम मार्ग अपनाने का संकल्प त्याग, साधना और आत्मकल्याण के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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