खेलजम्मू कश्मीरब्रेकिंग न्यूज़
BCCI ने JKCA प्रतिनिधि के रूप में देश रतन दुबे का नामांकन किया खारिज, जावेद किताब की आपत्तियां स्वीकार

ब्यूरो चीफ राजेश कुमार, पुंछ
जम्मू-कश्मीर। जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (JKCA) में चल रहे प्रशासनिक और कानूनी विवाद के बीच भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के चुनाव 2026 को लेकर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। BCCI के निर्वाचन अधिकारी ए.के. ज्योति ने JKCA की ओर से BCCI चुनाव के लिए देश रतन दुबे के नामांकन को खारिज कर दिया है।
BCCI निर्वाचन अधिकारी ने यह आदेश 8 सितंबर 2026 को पारित किया। देश रतन दुबे का नामांकन JKCA अध्यक्ष जावेद अहमद किताब और सुदर्शन मेहता की ओर से दाखिल आपत्तियों के बाद जांच के दायरे में आया था। BCCI चुनाव 18 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।
Apex Council की वैधता बनी मुख्य मुद्दा
निर्वाचन अधिकारी के समक्ष मुख्य सवाल JKCA के उस Apex Council की वैधता का था, जिसने 30 अगस्त 2026 को देश रतन दुबे को BCCI चुनाव के लिए JKCA का प्रतिनिधि नामित किया था।
आदेश के अनुसार, JKCA सचिव ने 22 मई और 30 मई 2026 को जारी संचार के माध्यम से Apex Council का गठन किया था। हालांकि, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, श्रीनगर ने 6 जून 2026 के आदेश के जरिए इन दोनों संचारों के संचालन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी।
BCCI निर्वाचन अधिकारी ने माना कि अदालत के उक्त आदेश के मद्देनजर 22 मई और 30 मई के संचार के माध्यम से गठित Apex Council प्रभावी रूप से अस्थायी रूप से निष्क्रिय (at abeyance) था।
ऐसी स्थिति में उसी Apex Council द्वारा 30 अगस्त को पारित वह प्रस्ताव, जिसके जरिए देश रतन दुबे को BCCI चुनाव के लिए JKCA प्रतिनिधि बनाया गया था, कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना गया।
नामांकन प्रक्रिया भी अधूरी मानी गई
निर्वाचन अधिकारी ने नामांकन की प्रक्रिया से जुड़े नियमों का भी उल्लेख किया। BCCI की 25 अगस्त 2026 की अधिसूचना के पैराग्राफ 3(G) के तहत JKCA जैसे पूर्ण सदस्य संघ के संविधान के अनुरूप सक्षम नामांकन अथवा नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा पारित प्रस्ताव की प्रति प्रस्तुत करना आवश्यक था।
चूंकि 30 अगस्त का Apex Council प्रस्ताव ही वैध नहीं माना गया, इसलिए निर्वाचन अधिकारी ने निष्कर्ष निकाला कि देश रतन दुबे का नामांकन निर्धारित आवश्यकता को पूरा नहीं करता।
इसी आधार पर दुबे को BCCI Election 2026 की Final Electoral Roll में JKCA प्रतिनिधि के रूप में शामिल करने से इनकार कर दिया गया।
जावेद किताब की आपत्ति पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी
मामले में देश रतन दुबे और JKCA सचिव की ओर से यह दलील भी दी गई थी कि जावेद अहमद किताब को आपत्ति दाखिल करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्हें JKCA अध्यक्ष के पद से निलंबित किया गया है।
BCCI निर्वाचन अधिकारी ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि हालांकि अदालत के एक आदेश के तहत किताब को JKCA अध्यक्ष के रूप में शक्तियों का प्रयोग करने से अस्थायी रूप से रोका गया था, लेकिन इससे उन्हें BCCI निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराने से नहीं रोका गया।
इसलिए जावेद किताब के locus standi यानी आपत्ति दर्ज करने के अधिकार पर उठाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया गया।
अन्य कानूनी मामलों का भी किया गया उल्लेख
दुबे के नामांकन के खिलाफ दाखिल आपत्तियों में कुछ अन्य न्यायिक मामलों और दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया था। इनमें एक आपराधिक शिकायत से संबंधित जमानत बांड और ₹10,000-₹10,000 की जमानत राशि से जुड़े दस्तावेज का हवाला दिया गया।
इसके अलावा कथित फर्जीवाड़े से संबंधित एक अन्य आपराधिक मामला तथा ₹100 करोड़ के हर्जाने से जुड़े सिविल मुकदमे का भी उल्लेख आपत्तियों में किया गया था।
हालांकि, BCCI निर्वाचन अधिकारी का अंतिम निर्णय इन आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि मुख्य रूप से Apex Council की कानूनी स्थिति और 30 अगस्त के नामांकन प्रस्ताव की वैधता पर आधारित रहा।
JKCA के सामने अब आगे की चुनौती
देश रतन दुबे का नामांकन खारिज होने के बाद JKCA के सामने अब अपने प्रतिनिधि के वैध नामांकन को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा हो गया है। खासतौर पर तब, जब श्रीनगर की अदालत के 6 जून के आदेश के कारण Apex Council के गठन से जुड़े पूर्व संचार प्रभावी नहीं हैं।
BCCI निर्वाचन अधिकारी के आदेश से फिलहाल इतना स्पष्ट है कि 30 अगस्त 2026 के Apex Council प्रस्ताव के आधार पर देश रतन दुबे को BCCI चुनाव के लिए JKCA प्रतिनिधि के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BCCI चुनाव से पहले JKCA अपने प्रतिनिधि के चयन के लिए किस वैधानिक प्रक्रिया का सहारा लेता है।
नोट: यह रिपोर्ट BCCI निर्वाचन अधिकारी के आदेश में दर्ज तथ्यों और निष्कर्षों पर आधारित है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ उल्लेखित मामलों और आरोपों को न्यायालय द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध माना जाना आवश्यक नहीं है।
Subscribe to my channel


