जसोल, 29 जून। अणुव्रत समिति जसोल की साधारण सभा सोमवार को पुराने ओसवाल भवन में समिति अध्यक्ष महावीरचंद सालेचा की अध्यक्षता में आयोजित हुई। सभा में नैतिकता, सद्भावना और नशा मुक्ति अभियान को जन-जन तक पहुंचाने सहित कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं पूर्व सरपंच भंवरलाल भन्साली मुख्य अतिथि तथा जैन श्वेतांबर तेरापंथ सभा के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ अणुव्रती ईश्वरचंद इन्दा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण को वंदन के साथ हुई। इस दौरान योगक्षेम वर्ष 2026-27 में लाडनूं में आयोजित होने वाले विभिन्न शिविरों की जानकारी भी दी गई।
महिला मंडल अध्यक्ष ममता मेहता, मंजूदेवी डोसी, मीना गोलेछा और कोमल कंकु चोपड़ा सहित महिला सदस्यों ने सामूहिक रूप से “संयममय जीवन हो…” अणुव्रत गीतिका प्रस्तुत की। इसके बाद निवर्तमान अध्यक्ष पारसमल गोलेछा ने अणुव्रत आचार संहिता का सामूहिक वाचन कराया, जिसे उपस्थित सदस्यों ने अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
अध्यक्ष महावीरचंद सालेचा ने बताया कि समिति द्वारा वर्ष 2026 का अणुव्रत कैलेंडर जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भेंट कर उन्हें अणुव्रत दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया तथा नशामुक्त समाज निर्माण का संकल्प दिलाया गया।
समिति के मंत्री सफरूखान ने वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक आयोजित 53 कार्यक्रमों की जानकारी प्रस्तुत की, जबकि कोषाध्यक्ष भिकमचंद छाजेड़ ने आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।
उपाध्यक्ष प्रवीणचंद भन्साली ने अणुव्रत गीतिका के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए ई-टैक्सी के माध्यम से अभियान चलाने तथा “नशा मुक्त जसोल” जनजागरण अभियान को गति देने का सुझाव दिया। पत्रकार कांतिलाल ढेलड़िया ने प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
वरिष्ठ अणुव्रती ईश्वरचंद इन्दा ने समाज में बढ़ते नशे के प्रचलन को रोकने के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया। वहीं मुख्य अतिथि भंवरलाल भन्साली ने अणुव्रत समिति के कार्यों की सराहना करते हुए भविष्य में भी हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
महिला मंडल अध्यक्ष ममता गांधी मेहता ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कोमल कंकु चोपड़ा ने सभी उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
सभा के दौरान “निज पर शासन, फिर अनुशासन”, “संयम ही जीवन है”, “अहिंसक चेतना का जागरण हो, नैतिक मूल्यों का विकास हो” तथा “नशा नाश का द्वार है” जैसे प्रेरक नारों के साथ समाज में नैतिक मूल्यों और नशा मुक्ति का संदेश दिया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन समिति मंत्री सफरूखान ने किया।