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खेत बचाओ अभियान-2026 के तहत किसानों को दिया गया प्रशिक्षण, जल संरक्षण और दलहनी फसलों पर जोर

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती, 2 जून 2026। कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती द्वारा “खेत बचाओ अभियान-2026” के अंतर्गत किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंचाई बंधु, बस्ती के उपाध्यक्ष गजेन्द्र मणि त्रिपाठी तथा ग्राम माझा के प्रधान साहबदीन निषाद उपस्थित रहे।
अतिथियों ने किसानों को जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन एवं सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों के महत्व से अवगत कराते हुए जल संसाधनों के वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण उपयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में पानी की बचत और उसका प्रभावी प्रबंधन कृषि की सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एस. के. तोमर ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मृदा स्वास्थ्य संरक्षण और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश जरूरी है। दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर भूमि की उर्वरता बढ़ाती हैं, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और उत्पादन लागत में भी कमी आती है।
डॉ. तोमर ने किसानों को धान-गेहूं आधारित खेती में मूंग, उड़द, अरहर, चना और मसूर जैसी दलहनी फसलों को शामिल करने की सलाह दी। उन्होंने फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेत में मिलाने, हरी खाद एवं जैव उर्वरकों के उपयोग तथा मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, जल संरक्षण तकनीकों तथा खरीफ मौसम की उन्नत कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। किसानों को नियमित रूप से मृदा जांच कराने और वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप कृषि आदानों का उपयोग करने की सलाह भी दी गई।
इस अवसर पर NICRA (नेशनल इनोवेशंस इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर) परियोजना के तहत जलवायु अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए चयनित परियोजना ग्राम चांदो और माझा के किसानों को बाढ़ एवं जलभराव सहनशील धान की उन्नत प्रजाति “सांभा सब-1” का बीज वितरित किया गया। परियोजना के अंतर्गत दोनों गांवों के 35-35 किसानों सहित कुल 70 कृषकों को धान बीज उपलब्ध कराया गया।
वैज्ञानिकों ने किसानों को इस प्रजाति की विशेषताओं, बीज उपचार, पौध प्रबंधन तथा जलवायु जोखिमों से बचाव संबंधी तकनीकी जानकारी भी प्रदान की। कार्यक्रम के अंत में किसानों ने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, जल बचत, फसल विविधीकरण एवं दलहनी फसलों के विस्तार के माध्यम से सतत एवं लाभकारी कृषि को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण युवा, महिला कृषक एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।

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