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अरावली विहार में ‘ब्लैक गोल्ड’ का पहला उत्पादन, गीले कचरे से बनेगा पौष्टिक कम्पोस्ट
सामुदायिक सहभागिता से स्वच्छता की नई पहल, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
भिवाड़ी। शहर के अरावली विहार क्षेत्र में स्वच्छता और सतत कचरा प्रबंधन को लेकर एक अभिनव पहल शुरू की गई है। व्हाई वेस्ट वेडनेसडेज फाउंडेशन, नगर परिषद भिवाड़ी तथा अरावली विहार आरडब्ल्यूए के संयुक्त सहयोग और राजस्थान प्राइम स्टील प्रोसेसिंग सेंटर प्रा. लि. (RPSC) के CSR सहयोग से संचालित “प्रोजेक्ट स्वच्छ संकल्प” के तहत पोषक तत्वों से भरपूर कम्पोस्ट ‘ब्लैक गोल्ड’ के पहले बैच का उत्पादन किया गया। इस उपलब्धि को क्षेत्र में सामुदायिक आधारित वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजना के तहत घरों से निकलने वाले गीले कचरे को पूरी तरह गंध-रहित GAIA कम्पोस्टिंग यूनिट के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही प्रोसेस किया गया। इसके बाद इस जैविक कचरे को उपयोगी एवं उच्च गुणवत्ता वाले कम्पोस्ट में परिवर्तित किया गया, जिसे ‘ब्लैक गोल्ड’ नाम दिया गया है। यह कम्पोस्ट पौधों और मिट्टी के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है। इस पहल का उद्देश्य केवल कचरे का निस्तारण करना नहीं, बल्कि लोगों में स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करना भी है। परियोजना के अंतर्गत डोर-टू-डोर जागरूकता अभियान चलाया गया, जिसमें नागरिकों को गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने के लिए प्रेरित किया गया। इसके साथ ही कम्पोस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, सफाई कर्मचारियों का प्रशिक्षण तथा निरंतर सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की गई।
परियोजना से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि ‘ब्लैक गोल्ड’ की पहली फसल इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि समुदाय, स्थानीय संस्थाएं और सामाजिक संगठन मिलकर कार्य करें तो लैंडफिल पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि शहर में स्वच्छता व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बनेगी।
नगर परिषद एवं परियोजना से जुड़े संगठनों ने इसे भिवाड़ी के लिए एक सकारात्मक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह मॉडल भविष्य में अन्य आवासीय कॉलोनियों और संस्थाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा। यदि इसी प्रकार सामुदायिक सहभागिता के साथ सतत कचरा प्रबंधन अपनाया जाए तो ‘जीरो वेस्ट टू लैंडफिल’ जैसे लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गीले कचरे का स्थानीय स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने से प्रदूषण कम होगा, दुर्गंध की समस्या समाप्त होगी तथा जैविक खाद के रूप में किसानों और बागवानी कार्यों को भी लाभ मिलेगा। अरावली विहार की यह पहल अब शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का नया उदाहरण बनती दिखाई दे रही है।

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