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बुद्ध पूर्णिमा विशेष: भगवान बुद्ध का जीवन-दर्शन आज भी मानवता के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शक – प्रदीप कुमार कुशवाहा

संवाददाता वेदान्त सिंह

 

लखनऊ। बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर दार्शनिक एवं चिंतक प्रदीप कुमार कुशवाहा ने भगवान बुद्ध के जीवन-दर्शन को केवल धार्मिक विचारधारा नहीं, बल्कि मनुष्य के मन, व्यवहार और जीवन को समझने का एक “वैज्ञानिक ब्लूप्रिंट” बताया। उन्होंने कहा कि बुद्ध का दर्शन आज के तनावपूर्ण और असंतुलित जीवन में मानसिक शांति, विवेक और संतुलन का सबसे प्रासंगिक मार्ग प्रस्तुत करता है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध के दर्शन की शुरुआत ‘दुःख’ की यथार्थवादी स्वीकारोक्ति से होती है। बुद्ध ने जीवन में असंतोष, बीमारी, वियोग और परिवर्तन को स्वाभाविक बताया तथा दुःख का मूल कारण ‘तृष्णा’ यानी अनित्य वस्तुओं को पकड़कर रखने की इच्छा को माना। उनके अनुसार, जब मनुष्य परिवर्तनशील चीजों को स्थायी मानकर उनसे चिपक जाता है, तब पीड़ा उत्पन्न होती है।

प्रदीप कुमार कुशवाहा ने बुद्ध के “मध्यम मार्ग” को आधुनिक जीवन के लिए अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि बुद्ध ने न तो भोग-विलास में डूबने और न ही शरीर को अनावश्यक कष्ट देने का समर्थन किया। उन्होंने संतुलित जीवनशैली को ही सच्चा मार्ग बताया। यह सिद्धांत आज के समय में कार्य-जीवन संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि बुद्ध का दर्शन भाग्यवाद या अंधविश्वास पर नहीं, बल्कि “कार्य-कारण संबंध” पर आधारित है। बुद्ध के अनुसार प्रत्येक दुःख के पीछे कोई कारण होता है और जब कारण बदलते हैं, तो परिणाम भी बदल जाते हैं। यह विचार मनुष्य को अपने जीवन के प्रति जिम्मेदार और आत्मनिर्भर बनाता है।

निर्वाण की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि बुद्ध के लिए मुक्ति किसी परलोक की अवधारणा नहीं, बल्कि इसी जीवन में क्रोध, लोभ और मोह जैसी मानसिक अग्नियों से मुक्ति प्राप्त करना है। जब मन इन विकारों से मुक्त हो जाता है, तभी वास्तविक शांति और आंतरिक स्वतंत्रता का अनुभव होता है।

उन्होंने कहा कि बुद्ध का संदेश “अप्प दीपो भव” अर्थात “अपना दीपक स्वयं बनो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। यह दर्शन विवेक, करुणा, तर्क और आत्मपरिवर्तन के माध्यम से समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देता है।

अंत में उन्होंने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर सभी के मंगल और कल्याण की कामना करते हुए कहा— “भवतु सब्ब मंगलं, रक्खन्तु सब्ब देवता।” अर्थात — सभी का मंगल हो और सभी दैवीय शक्तियाँ सबकी रक्षा करें।

— प्रदीप कुमार कुशवाहा, दार्शनिक, लखनऊ

Vedant Singh

Vedant Singh S/O Dr. Naveen Singh Mo. Belwadandi Po. Gandhi Nagar Basti Pin . 272001 Mob 8400883291 BG . O Positive vsvedant12345@gmail.com

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