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बस्ती: आर्या परियोजना के तहत मधुमक्खी पालन पर सात दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती, 17 दिसम्बर 2025 (सू.वि.)
आचार्य नरेंद्र कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) द्वारा संचालित एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी), कानपुर द्वारा वित्त पोषित कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी आर्या (ARYA – Attracting and Retaining Youth in Agriculture) परियोजना के अंतर्गत मधुमक्खी पालन विषय पर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती के प्रभारी अधिकारी डॉ. पी.के. मिश्रा ने किया। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है, जिससे ग्रामीण युवाओं की आय बढ़ाने के साथ-साथ परागण के माध्यम से फसलों की उत्पादकता भी बढ़ती है। आर्या परियोजना का उद्देश्य युवाओं को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रशिक्षण के प्रथम सत्र में मधुमक्खी पालन की मूल अवधारणा, मधुमक्खियों की प्रजातियाँ, छत्ता प्रबंधन, जीवन चक्र, शहद उत्पादन की संभावनाएँ तथा आय-वृद्धि के अवसरों पर विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही, मधुमक्खी पालन को कृषि एवं बागवानी फसलों के साथ जोड़कर अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के कोर्स कोऑर्डिनेटर एवं फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. प्रेम शंकर ने प्रतिभागियों से मधुमक्खी प्रजातियों की पहचान, कॉलोनी प्रबंधन, रोग-कीट नियंत्रण, शहद निष्कर्षण एवं विपणन जैसे विषयों को गंभीरता से सीखने का आह्वान किया और प्रशिक्षण उपरांत भी तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
पादप प्रजनन एवं आनुवांशिकी वैज्ञानिक डॉ. वी.बी. सिंह ने बताया कि मधुमक्खियों द्वारा किया गया परागण फसलों, फल-सब्जियों एवं तिलहनों की उपज और गुणवत्ता में 20–30 प्रतिशत तक वृद्धि कर सकता है, जिससे क्षेत्र की कृषि उत्पादकता सुदृढ़ होती है।
गृह विज्ञान वैज्ञानिक डॉ. अंजलि वर्मा ने कहा कि मधुमक्खी पालन पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ कम लागत वाला, पर्यावरण-अनुकूल आय सृजन का सशक्त माध्यम है। शहद, मोम, परागकण एवं रॉयल जेली जैसे उत्पादों के मूल्य संवर्धन से महिलाएँ घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
प्रथम दिन शस्य विज्ञान वैज्ञानिक हरिओम मिश्रा ने आगामी दिनों में होने वाले प्रायोगिक प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की। प्रशिक्षण में जिले के विभिन्न विकास खंडों से चयनित 25 युवा कृषक एवं ग्रामीण युवक-युवतियाँ भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान किया गया तथा नियमित उपस्थिति और सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में अपनाने हेतु प्रेरित किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र ने आशा व्यक्त की कि यह प्रशिक्षण युवाओं के लिए स्वरोजगार का सशक्त माध्यम बनेगा और जिले में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देगा।

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