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EWS पात्रता नियमों के सरलीकरण एवं आवश्यक संशोधन के लिए अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने उठाई आवाज
आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के हितों को लेकर जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस; राजस्थान की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर विशेष आयोग के गठन का सुझाव

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
जयपुर, 5 अक्टूबर 2026। अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा, राजस्थान प्रदेश द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग (EWS) के पात्र परिवारों, विद्यार्थियों एवं युवाओं के हितों से जुड़े पात्रता नियमों के सरलीकरण एवं आवश्यक संशोधन को लेकर जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस दौरान EWS व्यवस्था को अधिक सरल, व्यावहारिक एवं क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुरूप बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव रखते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार से सकारात्मक पहल का आग्रह किया गया।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मेश कुमार सिंह ने कहा कि महासभा का मूल उद्देश्य “एकता, स्वाभिमान और राष्ट्रहित” है। इसी ध्येय के साथ महासभा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने, समाज के स्वाभिमान एवं अधिकारों की रक्षा करने और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए निरंतर कार्य कर रही है। क्षत्रिय समाज की परंपरा सदैव समाज और राष्ट्र के व्यापक हितों के साथ खड़े रहने तथा जरूरतमंद, गरीब और कमजोर वर्ग को संबल प्रदान करने की रही है।
उन्होंने कहा कि EWS का विषय आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लाखों परिवारों, विद्यार्थियों और युवाओं के भविष्य एवं अवसरों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। सामान्य वर्ग के हितों के लिए कार्यरत सभी सामाजिक संगठनों को EWS पात्रता नियमों के सरलीकरण एवं आवश्यक संशोधन के लिए एकजुट होकर आगे आना चाहिए। आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए सामूहिक रूप से प्रभावी आवाज उठाना समय की आवश्यकता है।
लक्ष्मेश कुमार सिंह ने कहा कि राजस्थान में सामान्य वर्ग के हितों एवं उनसे जुड़े विषयों पर कार्य करने के लिए आयोग का गठन किया गया है। आयोग के माध्यम से सामान्य वर्ग से जुड़े विषयों, मांगों और व्यावहारिक समस्याओं पर प्रभावी रूप से कार्य किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित, धर्महित और समाजहित में सकारात्मक कार्य करने वाले सभी समाजों एवं संगठनों के साथ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा मजबूती से खड़ी रहेगी। छत्तीस कौम को साथ लेकर गरीब, वंचित, कमजोर एवं जरूरतमंद वर्ग की आवाज को शक्ति देना तथा उनके हितों के लिए संबल बनकर खड़ा रहना महासभा की सामाजिक प्रतिबद्धता है। एकता हमारी शक्ति, स्वाभिमान हमारी पहचान और राष्ट्रहित हमारा सर्वोच्च ध्येय है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के युवा राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के परिवार आर्थिक चुनौतियों के बीच अपने परिवार और भविष्य को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसे परिवारों के लिए EWS प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल, सुगम और समयबद्ध होनी चाहिए। राज्य स्तर पर प्रमाण-पत्र प्राप्त करने तथा केंद्र सरकार की नौकरियों एवं अन्य अवसरों के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे पात्र व्यक्ति को सहज और पारदर्शी प्रक्रिया उपलब्ध हो सके।
कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने EWS पात्रता में कृषि भूमि की सीमा का विषय उठाते हुए कहा कि राजस्थान की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियां देश के अनेक अन्य राज्यों से अलग हैं। विशेष रूप से बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, बीकानेर, चूरू, नागौर सहित पश्चिमी राजस्थान तथा प्रदेश के अन्य असिंचित क्षेत्रों में कृषि का बड़ा हिस्सा वर्षा आधारित है और भूमि की उत्पादकता भी क्षेत्रवार भिन्न है।
उन्होंने कहा, “मैं स्वयं भी बालोतरा क्षेत्र से आता हूं और यहां की भौगोलिक एवं कृषि परिस्थितियों से भली-भांति परिचित हूं। इन क्षेत्रों में भूमि से होने वाली वास्तविक आय और उसका आर्थिक मूल्य स्थानीय परिस्थितियों से निर्धारित होता है। इसलिए पांच एकड़ कृषि भूमि की सीमा का मूल्यांकन केवल भूमि के क्षेत्रफल के आधार पर करने के स्थान पर भूमि की उत्पादकता, सिंचाई की उपलब्धता, क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति और परिवार की वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए।”
कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों की भौगोलिक, कृषि एवं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए EWS व्यवस्था के समग्र अध्ययन की आवश्यकता है। राजस्थान की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर भी एक प्रभावी आयोग का गठन किया जाना चाहिए, जो देशभर में आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग से जुड़े विषयों, EWS पात्रता मानदंडों, प्रमाण-पत्र प्रक्रिया, क्षेत्रीय विषमताओं और व्यावहारिक समस्याओं का व्यापक अध्ययन करे। आयोग में विषय विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, संबंधित पक्षों एवं EWS वर्ग के प्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए तथा उनकी अनुशंसाओं के आधार पर सामान्य वर्ग के हितों से जुड़े आवश्यक सुधारों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए। इससे EWS व्यवस्था को अधिक सरल, न्यायसंगत, व्यावहारिक एवं प्रभावी स्वरूप देने की दिशा में स्थायी समाधान तैयार किया जा सकेगा।
कुंवर हरिशचंद्र सिंह जसोल ने राजस्थान में गठित आयोग के अध्यक्ष पद को तत्काल प्रभाव से भरने की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि आयोग का अध्यक्ष पद अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके रिक्त रहने से आयोग अपने उद्देश्यों एवं जिम्मेदारियों का पूर्ण प्रभाव के साथ निर्वहन नहीं कर पाता। राज्य सरकार इस महत्वपूर्ण पद पर शीघ्र नियुक्ति कर आयोग को पूर्ण रूप से सक्रिय एवं प्रभावी बनाए, ताकि सामान्य वर्ग तथा EWS से जुड़े विषयों, मांगों और व्यावहारिक समस्याओं को गंभीरता से समझकर उनका समयबद्ध एवं प्रभावी समाधान किया जा सके।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में गरीब, वंचित, मध्यम वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने, उनके जीवन स्तर में सुधार लाने और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य हुआ है। शिक्षा, रोजगार, आवास, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न पहलों के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का निरंतर प्रयास किया गया है। इसी क्रम में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को EWS आरक्षण के माध्यम से शिक्षा और सरकारी रोजगार में अवसर उपलब्ध कराने की पहल भी ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण कदम रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के परिवारों को पूर्ण विश्वास और बड़ी अपेक्षा है कि EWS व्यवस्था लागू करने के मूल उद्देश्य को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब इससे जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों, क्षेत्रीय विषमताओं और पात्रता मानदंडों का भी संवेदनशीलता एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ अध्ययन किया जाएगा। आवश्यक सुधारों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि EWS व्यवस्था का लाभ वास्तविक रूप से आर्थिक रूप से कमजोर पात्र परिवारों, विद्यार्थियों और युवाओं तक सरलता एवं पारदर्शिता के साथ पहुंचे।
EWS का मूल भाव आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को अवसर, सम्मान और आगे बढ़ने का संबल प्रदान करना है। इसी भावना के अनुरूप पात्रता मानदंडों में संबंधित क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, सिंचित एवं असिंचित भूमि, भूमि की वास्तविक उत्पादकता, परिवार की आर्थिक स्थिति तथा स्थानीय परिस्थितियों को उचित महत्व मिलने से व्यवस्था और अधिक प्रभावी एवं जनहितकारी बनेगी।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने केंद्र एवं राज्य सरकार से आग्रह किया कि EWS पात्रता नियमों के सरलीकरण एवं आवश्यक संशोधन पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाए, राजस्थान में गठित आयोग के रिक्त अध्यक्ष पद पर शीघ्र नियुक्ति कर उसे प्रभावी बनाया जाए तथा राजस्थान की तर्ज पर राष्ट्रीय स्तर पर भी एक सशक्त आयोग का गठन किया जाए। इसके माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के पात्र परिवारों, विद्यार्थियों एवं युवाओं की वास्तविक समस्याओं एवं मांगों का व्यापक अध्ययन कर सरल, पारदर्शी, न्यायसंगत और व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
महासभा ने सामान्य वर्ग के हितों के लिए कार्यरत सभी सामाजिक संगठनों से भी इस महत्वपूर्ण विषय पर एकजुट होकर आवाज उठाने तथा सकारात्मक एवं प्रभावी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

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