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बस्ती से दिल्ली तक हरीश द्विवेदी का सियासी सफर, संगठन की रणनीति से राष्ट्रीय नेतृत्व तक बनाई मजबूत पहचान

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती। सियासत में भीड़ बहुत होती है, लेकिन पहचान उन्हीं नेताओं की बनती है, जो संगठन की नस-नस को समझते हुए लगातार मेहनत, अनुशासन और रणनीतिक क्षमता के साथ आगे बढ़ते हैं। हरीश द्विवेदी का राजनीतिक सफर इसी बात की मिसाल है। बस्ती की धरती से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाले हरीश द्विवेदी ने संगठनात्मक कार्यशैली और जमीनी जुड़ाव के बल पर राजनीति में अलग मुकाम हासिल किया है।
22 अक्टूबर 1973 को उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में जन्मे हरीश द्विवेदी के जीवन की शुरुआत एक सामान्य परिवार से हुई। उनके पिता साधुशरण दुबे और माता यशोदा देवी ने उन्हें संस्कार, अनुशासन और सामाजिक सरोकारों की सीख दी। गोरखपुर विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन को अपना कार्यक्षेत्र बनाया।
उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और संगठन के विभिन्न स्तरों पर काम करते हुए अपनी कार्यक्षमता साबित की। शुरुआती दौर में कृषि और सामाजिक कार्यों से जुड़ाव ने उन्हें जमीनी परिस्थितियों को समझने का अवसर दिया। यही अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक शैली की महत्वपूर्ण ताकत बना।
संगठन में लगातार सक्रियता के चलते उन्होंने जिला और प्रदेश स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक मेहनती, अनुशासित और समर्पित संगठनकर्ता के रूप में बनी। भारतीय जनता पार्टी में उनकी भूमिका बढ़ती गई और वे पार्टी के प्रभावशाली नेताओं में शामिल होते चले गए।
वर्ष 2012 में उन्होंने पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें सफलता नहीं मिली। इस हार को उन्होंने राजनीतिक यात्रा की रुकावट नहीं बनने दिया, बल्कि इससे सीख लेकर संगठन और जनसंपर्क को और मजबूत किया। वर्ष 2014 में बस्ती लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर वे पहली बार संसद पहुंचे। इसके बाद वर्ष 2019 में भी उन्होंने जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया।
सांसद के रूप में विभिन्न संसदीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के साथ उन्होंने अपनी कार्यशैली और राजनीतिक समझ का परिचय दिया। समय के साथ पार्टी संगठन में उनकी जिम्मेदारियां बढ़ती गईं और उन्हें महत्वपूर्ण रणनीतिक एवं प्रबंधकीय दायित्व सौंपे गए।
वर्ष 2024 के बाद उन्हें असम जैसे महत्वपूर्ण राज्य का प्रभारी बनाया गया। संगठनात्मक स्तर पर उनकी सक्रिय भूमिका और रणनीतिक क्षमता को देखते हुए वर्ष 2026 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाए जाने की बात सामने आई, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर उनकी राजनीतिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई।
हरीश द्विवेदी की राजनीति की खासियत यह मानी जाती है कि उनकी पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही, बल्कि संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं से संवाद बनाए रखने और रणनीतिक स्तर पर जिम्मेदारियां निभाने के कारण उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ा है। बस्ती से दिल्ली तक का उनका सफर एक जमीनी कार्यकर्ता के राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष संगठनात्मक दायित्वों तक पहुंचने की कहानी है।
प्रो. डॉ. नवीन सिंह
राष्ट्रीय महासचिव
विश्व संवाद परिषद योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा प्रकोष्ठ, भारत

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