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कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है : साध्वी श्री विश्वरत्नाश्रीजी मसा
चातुर्मास में कर्मों की निर्जरा करने का मिलता है शुभ अवसर

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग
बालोतरा, 30 जुलाई। नवकार कॉलोनी, गांधीपुरा में साध्वी श्री विमलप्रभाश्रीजी मसा आदि ठाणा-6 का भव्य एवं मंगलमय चातुर्मास चल रहा है। चातुर्मास के दौरान साध्वी भगवंतों द्वारा प्रतिदिन धर्म, साधना एवं आत्मकल्याण से जुड़े विषयों पर प्रेरणादायी प्रवचन दिए जा रहे हैं।
इसी क्रम में साध्वी श्री विश्वरत्नाश्रीजी मसा ने मन को प्रफुल्लित करने वाला प्रवचन देते हुए कहा कि “कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।” उन्होंने कहा कि चातुर्मास के चार महीनों में आत्मा से परमात्मा के मिलन की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।
साध्वी श्री ने कहा कि यदि अंतर में धर्म के प्रति रुचि और उमंग नहीं होगी तो जीवन में वास्तविक उल्लास नहीं आ सकता। उन्होंने नवकार महामंत्र की महिमा बताते हुए कहा कि नवकार मंत्र में एकाग्रता अत्यंत जरूरी है। नवकार महामंत्र भव-भव तक सुख प्रदान करने वाला है।
उन्होंने चातुर्मास में शुद्ध पानी और शुद्ध वाणी के महत्व को भी समझाया। साध्वी श्री ने कहा कि पानी तन को स्वच्छ बनाता है, जबकि शुद्ध वाणी तन और मन दोनों को स्वच्छ बनाने का कार्य करती है। इसलिए व्यक्ति को अपनी वाणी में मधुरता, संयम और पवित्रता बनाए रखनी चाहिए।
साध्वी श्री ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अपने कर्मों की निर्जरा करने का शुभ अवसर है। इन चार महीनों में अधिक से अधिक धर्माराधना, साधना और आत्मचिंतन करते हुए जीवन को बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए।
चातुर्मास के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं साध्वी भगवंतों के प्रवचनों का लाभ लेकर धर्माराधना कर रहे है।

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