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गौ-रक्षा दल का गंभीर आरोप: औरैया में 53 गोवंश की मौत मामले में प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर संकेत
उन्नाव में शंकराचार्य जी को सौंपा ज्ञापन, उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग

औरैया/उन्नाव: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। ‘गौ रक्षा दल (भारत)’ ने औरैया के विकास खंड अछल्दा के अंतर्गत सलेमपुर स्थित एक गौशाला में 53 गोवंश की दर्दनाक मौत का दावा किया है। संगठन ने इस मामले में गौशाला संचालक, स्थानीय पुलिस और प्रशासन पर मिलीभगत एवं साक्ष्यों को मिटाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
मुख्य बिंदु:
औरैया की एक गौशाला में 53 गोवंश की मृत्यु का आरोप है।
गौशाला का संचालन वर्तमान ब्लॉक प्रमुख (भाजपा) श्री शरद राणा द्वारा किया जा रहा है।
टीम गौ रक्षक ठाकुर अक्षय सेंगर मुरादगंज के अनुसार, 112 टीम और स्थानीय थाना अध्यक्ष (SHO) ने उचित कार्रवाई करने के बजाय अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
प्रशासन पर मामले को दबाने, लीपापोती करने और भ्रामक जानकारी फैलाने का आरोप है।
गौ रक्षा दल (भारत) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा रविंद्र दास ठाकुर जी महाराज
राष्ट्रीय प्रबंधक ठाकुर रेनू सेंगर जी
राष्ट्रीय महामंत्री आशीष मिश्रा जी ने उन्नाव में ‘गविष्ठि (गौरक्षार्थ-धर्मयुद्ध)’ यात्रा के दौरान जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज को इस घटना से अवगत कराया और एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह केवल गो-हत्या का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पुलिस की मिलीभगत का नग्न प्रदर्शन है।
आरोप और प्रशासनिक उदासीनता
संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो गौशाला संचालक ने उन्हें डरा-धमकाकर भगाने का प्रयास किया। टीम गौ रक्षक ठाकुर अक्षय सेंगर ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बावजूद ‘112’ टीम ने कोई उचित कार्रवाई नहीं की। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि जब वे अछल्दा थाने में साक्ष्य लेकर पहुंचे, तो थाना अध्यक्ष (SHO) ने न केवल दुर्व्यवहार किया, बल्कि साक्ष्यों को नकली बताते हुए वापस लौटा दिया।
संगठन का यह भी आरोप है कि ब्लॉक प्रमुख ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कुछ पत्रकारों को बुलाकर घटना को दबाने की कोशिश की और इसे केवल एक गोवंश की मृत्यु का मामला बताकर भ्रामक खबरें चलवाईं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
इस गंभीर मामले को लेकर गौ रक्षा दल ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
सीबीआई या एसआईटी जांच: प्रशासन की कथित मिलीभगत और इस ‘कवर-अप’ की निष्पक्ष जांच के लिए उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की जाए।
दोषियों पर सख्त कार्रवाई: ब्लॉक प्रमुख और लीपापोती में शामिल अधिकारियों के विरुद्ध सख्त दंडात्मक कार्रवाई हो और गौशाला का लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
सत्य उजागर हो: जिला प्रशासन द्वारा फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं का खंडन कर वास्तविक साक्ष्यों की जांच की जाए।
गौ रक्षा दल ने जगतगुरु शंकराचार्य जी से इस मामले में हस्तक्षेप करने और शासन को कड़े निर्देश देने की प्रार्थना की है ताकि बेजुबानों को न्याय मिल सके और सनातन धर्म की रक्षा हो सके।

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