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जनगणना ड्यूटी की आड़ में पदस्थापन व्यवस्था का दुरुपयोग: आखिर कब तक?

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
राजस्थान में पदोन्नति प्राप्त कर चुके हजारों कार्मिकों का पदस्थापन उनके सुविधाजनक स्थानों से दूर हुआ है। ऐसे में अनेक कार्मिकों ने जनगणना ड्यूटी को एक “लूप होल” के रूप में इस्तेमाल कर अपने मूल अथवा सुविधाजनक स्थान पर बने रहने का नया रास्ता खोज लिया है। संभावना है कि जनगणना के दूसरे चरण (मार्च–अप्रैल 2027 तक) वे इसी व्यवस्था का लाभ उठाते रहेंगे। जबकि जनगणना के प्रथम चरण का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा आगामी फरवरी मार्च तक ऐसे कार्मिकों के पास किसी भी तरह का कार्य नहीं है। हैरानी की बात है कि ऐसे लोग सुविधाजनक स्थान पर तबादला होते ही कार्यमुक्त होकर नवीन स्थान पर कार्यग्रहण भी कर लेते हैं। इस प्रकार ऊपर से नीचे तक यह मिला-जुली का खेल प्रतीत होता है। इन सबके बीच विडम्बना की बात है इसी जनगणना में ग्रामीण क्षेत्रवार चार्ज अधिकारी तहसीलदार को कार्यमुक्त करने के लिए कोई शर्त नहीं है।
इसका सबसे बड़ा नुकसान उन विद्यालयों एवं कार्यालयों को हो रहा है जहाँ उनका विधिवत पदस्थापन किया गया है। एक ओर वे कार्मिक वहाँ कार्यभार ग्रहण नहीं कर रहे हैं, दूसरी ओर उनकी सीटें भी रिक्त रहते हुए प्रभावी रूप से ब्लॉक हैं। परिणामस्वरूप संबंधित विद्यालयों और कार्यालयों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है तथा शिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं। तथा हजारों विद्यालय ऐसे शिक्षकों की राह ताकते रहते हैं।
वर्तमान तबादला प्रक्रिया के दौरान भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली, जहाँ कई स्थानों पर नए कार्मिकों के आने के बावजूद कुछ कर्मचारी विभिन्न व्यवस्थाओं का लाभ लेकर अपने पुराने स्थानों पर ही कार्यरत बने हुए हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो अप्रैल 2026 से अप्रैल 2027 तक पूरा शैक्षणिक सत्र प्रभावित होगा और सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों को शिक्षकों की कमी का खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
यह सही है कि कुछ शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी स्वतः निर्धारित हुई होगी, जबकि कुछ ने अपने निजी हित में प्रयास करके ड्यूटी लगवाई होगी। किन्तु चाहे कारण कोई भी हो, सबसे बड़ा नुकसान आमजन, सरकारी विद्यालयों और वहाँ अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों का हो रहा है।
प्रश्न यह है कि आखिर आमजन और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले मासूम विद्यार्थियों को प्रशासनिक खामियों और व्यवस्थागत कूटनीतियों का दंड कब तक भुगतना पड़ेगा?
समय की आवश्यकता है कि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस व्यवस्था की गंभीर समीक्षा करें और ऐसा प्रभावी समाधान लागू करें जिससे जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी सुचारु रूप से संपन्न हों तथा विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था भी बाधित न हो। दोनों व्यवस्थाओं के बीच संतुलन स्थापित करना ही विद्यार्थियों के हित में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।
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