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रैपुरा थाना में गिरफ्तारी के दो दिन बाद दिखाई गिरफ्तारी पर घमासान, परिजनों के पुलिस पर गंभीर आरोप

लोकेशन=रैपुरा।मध्य प्रदेश पन्ना
संवाददाता=सुधीर अग्रवाल के साथ कैमरा मेन मुकेश रजक
*रैपुरा थाना में गिरफ्तारी के दो दिन बाद दिखाई गिरफ्तारी पर घमासान, परिजनों के पुलिस पर गंभीर आरोप*
दो दिन तक थाने में रखा गया युवक को तीसरे दिन दिखाई गई गिरफ्तारी, रैपुरा पुलिस पर लगे गंभीर आरोप
पन्ना जिले के रैपुरा थाना क्षेत्र से एक ऐसा सनसनी प्रकरण आया जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मारपीट के एक मामले में जेल भेजे गए युवक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि युवक को पुलिस ने दो दिन पहले ही अपने कब्जे में ले लिया था, लेकिन उसकी गिरफ्तारी तीसरे दिन दर्शाई गई।
परिजनों के मुताबिक युवक को 22 जून की शाम से ही पुलिस ने अपने नियंत्रण में रखा हुआ था। उनका दावा है कि उसे पुराने थाना भवन में रखा गया था और परिवार के सदस्य लगातार उसे भोजन एवं नाश्ता पहुंचाते रहे। इतना ही नहीं, बुधवार सुबह भी परिजन युवक से मिलकर लौटे थे।
आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस रिकॉर्ड में गिरफ्तारी 24 जून को दिखाई गई क्यो उसी दिन मेडिकल परीक्षण कराकर युवक को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
परिजनों ने हिरासत के दौरान युवक के साथ मारपीट किए जाने के भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक सूचना परिवार को नहीं दी गई। आरोप यह भी है कि दोपहर के समय पुराने थाना परिसर के बाहर मौजूद लोगों को वहां से हटा दिया गया, जिसके बाद युवक को पीछे के रास्ते से नए थाना परिसर लाया गया और आगे की कानूनी कार्रवाई पूरी की गई।
इस पूरे मामले में कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि गिरफ्तारी 24 जून को हुई, तो उससे पहले युवक कहां था? यदि वह पुलिस हिरासत में नहीं था, तो परिजन लगातार किसे भोजन पहुंचा रहे थे और यदि वह पुलिस के कब्जे में था तो गिरफ्तारी दो दिन बाद क्यों दर्शाई गई?
स्थानीय लोगों का मानना है कि मामले की सच्चाई सीसीटीवी फुटेज, गिरफ्तारी मेमो, मेडिकल रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों से सामने आ सकती है।
वहीं पुलिस अधीक्षक निवेदिता नायडू पन्ना का कहना है इस पूरे मामले को दिखवाते हैं। एसडीओपी को भेजकर जांच करवाते हैं।
फिलहाल युवक के परिजनों ने लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सभी की निगाहें जांच पर टिकी हैं कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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