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प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए बस्ती में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित, किसानों से रसायनमुक्त खेती अपनाने का आह्वान

बस्ती से वेदान्त सिंह
बस्ती, 18 जून 2026। ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती में प्राकृतिक खेती विषयक एक दिवसीय कार्यशाला का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश एवं देश के विभिन्न गणमान्य व्यक्तियों, कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में किसानों ने सहभागिता कर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कामेश्वर सिंह ने किसानों से कृषि विज्ञान केंद्र से तकनीकी मार्गदर्शन प्राप्त कर प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है, जबकि प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की उत्पादन लागत कम कर उनकी आय बढ़ाने में सहायक है।
कार्यशाला में पूर्व सांसद एवं असम प्रभारी हरीश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला, पूर्व विधायक दयाराम चौधरी, भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष गोपेश्वर त्रिपाठी तथा भाजपा किसान मोर्चा बस्ती के अध्यक्ष दिलीप पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। वक्ताओं ने प्राकृतिक खेती को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए किसानों से मृदा, जल एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए रसायनमुक्त खेती अपनाने का आह्वान किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, बस्ती के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. पी. के. मिश्रा के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने किसानों को प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, मल्चिंग, जैविक कीट एवं रोग प्रबंधन तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. हरिओम मिश्र ने कहा कि प्राकृतिक खेती में स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य संवर्धन महत्वपूर्ण है तथा यह भविष्य की टिकाऊ कृषि व्यवस्था का आधार बन सकती है। वहीं डॉ. अंजली वर्मा ने सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती को प्रभावी विकल्प बताया।
कार्यक्रम में संयुक्त निदेशक कृषि, उपनिदेशक कृषि, यूपी एग्रीज के मंडल परियोजना प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार, वरिष्ठ उप प्रबंधक आशीष सिंह, शिवाजी कनौजिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यशाला में शामिल किसानों ने प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल भी उपस्थित रहे। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

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