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सतना जिले के मेहुती ग्राम में शिक्षा का नया सूर्योदय: सरस्वती शिशु मंदिर का भव्य उद्घाटन, संस्कारयुक्त शिक्षा से संवरेगा ग्रामीण अंचल का भविष्य

सतना, 18 जून 2026।
ग्रामीण भारत के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सतना जिले के मझगवां विकासखंड अंतर्गत ग्राम मेहुती में सरस्वती शिशु मंदिर का भव्य शुभारंभ किया गया। विद्या भारती मध्य क्षेत्र के तत्वावधान में स्थापित यह विद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, राष्ट्रभक्ति और संस्कार निर्माण का भी प्रमुख माध्यम होगा। भारतीय संस्कृति की सुगंध के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ भारतीय संस्कृति एवं परंपरा के अनुरूप माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ। मुख्य अतिथि विद्या भारती मध्य क्षेत्र के मंत्री श्री जितेन्द्र सिंह परिहार सहित सभी अतिथियों ने माँ वीणापाणि का पूजन कर ज्ञान की ज्योति प्रज्ज्वलित की।
इसके पश्चात सरस्वती शिशु मंदिर चूँद से आईं दीदियों द्वारा प्रस्तुत मधुर एवं भावपूर्ण वाणी वंदना ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। उपस्थित जनसमूह मंत्रमुग्ध होकर भारतीय संस्कृति की इस सुंदर झलक का साक्षी बना।
विद्या भारती का उद्देश्य: शिक्षा के साथ संस्कार कार्यक्रम का संचालन संकुल प्रमुख श्री नत्थू सिंह ने प्रभावी ढंग से किया तथा सभी अतिथियों का परिचय कराया।अपने प्रेरक उद्बोधन में सह प्रांत प्रमुख श्री संत कुमार शुक्ला ने विद्या भारती के गौरवशाली इतिहास, उसकी कार्यप्रणाली तथा समाज निर्माण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि—”जब समाज शिक्षा के कार्य में सहभागी बनता है, तब विद्यालय केवल भवन नहीं रहते, बल्कि राष्ट्र निर्माण के केंद्र बन जाते हैं।”उन्होंने ग्रामीणों से विद्यालय के संचालन एवं विकास में सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।“केवल शिक्षा नहीं, संस्कार भी आवश्यक” — जितेन्द्र सिंह परिहार
मुख्य वक्ता एवं मुख्य अतिथि श्री जितेन्द्र सिंह परिहार ने अपने उद्बोधन में विद्या भारती की भावी योजनाओं और शिक्षा दर्शन को साझा करते हुए कहा—”आज के युग में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। बच्चों को ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है जो उनमें चरित्र, राष्ट्रभक्ति, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास करे। विद्या भारती इसी उद्देश्य को लेकर कार्य कर रही है।”उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मेहुती में प्रारंभ हुआ यह विद्यालय आने वाले वर्षों में क्षेत्र के बच्चों के उज्ज्वल भविष्य का आधार बनेगा।उद्घाटन के साथ ही प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ
इस अवसर की सबसे प्रेरणादायक बात यह रही कि उद्घाटन समारोह के दौरान ही विद्यालय में नए सत्र हेतु तीन भैया-बहनों का प्रवेश कराया गया। यह ग्रामीण समाज के विश्वास और विद्यालय के प्रति उत्साह का प्रत्यक्ष प्रमाण था।
अभिभावकों ने आशा व्यक्त की कि अब उनके बच्चों को अपने ही गांव में गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारयुक्त शिक्षा प्राप्त होगी।
क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के अनेक शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से—
शंकर प्रसाद अग्निहोत्री (अध्यक्ष, ग्राम भारती सतना)
रोहणी प्रसाद द्विवेदी (उपाध्यक्ष, ग्राम भारती सतना) शिवकांत गौतम (सदस्य) विक्रम पटनहा (सदस्य) संत कुमार शुक्ला (सह प्रांत प्रमुख) नत्थू सिंह (संकुल प्रमुख) श्रीधर सिंह (प्रधानाचार्य, अबेर) इंद्र भान सिंह (प्रधानाचार्य, बिहरा क्रमांक-1)
पवन कुमार गौतम (बैरहना)
तथा क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिक मंगल प्रसाद पाण्डेय, भीष्म प्रसाद त्रिपाठी, कमलेश प्रसाद पाण्डेय, बृजेंद्र सिंह, पुष्पराज सिंह, सूरत लाल त्रिपाठी, ओंकार नाथ तिवारी, मनीष कुमार तिवारी, अभिलाष सिंह,दिनेश सिंह, लाखन सिंह, ओम सिंह,ओंकार सिंह,जगदीश त्रिपाठी,सूरत लाल त्रिपाठी,चुन कु ,लक्ष्मण ,एवं जगदीश प्रसाद पाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम की सफलता में सरस्वती शिशु मंदिर चूँद के आचार्यों एवं दीदियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा।
शिक्षा की नई ज्योति, विकास की नई उम्मीद कार्यक्रम का समापन वैदिक परंपरा के अनुरूप शांति मंत्र के सामूहिक पाठ के साथ हुआ। समापन के समय उपस्थित अभिभावकों और ग्रामीणों के चेहरों पर अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नई आशा और उत्साह स्पष्ट दिखाई दे रहा था। मेहुती ग्राम में सरस्वती शिशु मंदिर का शुभारंभ केवल एक विद्यालय का उद्घाटन नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल में ज्ञान, संस्कार और राष्ट्र निर्माण की नई चेतना का शुभारंभ है। यह संस्थान आने वाले वर्षों में शिक्षा के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य करेगा और क्षेत्र के बच्चों के सपनों को नई उड़ान प्रदान करेगा।

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