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अणुव्रत विश्व भारती द्वारा निर्देशित एवं अणुव्रत समिति जयपुर द्वारा आयोजित “अणुव्रत काव्यधारा” कार्यक्रम सम्पन्न

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
जयपुर। अणुव्रत विश्व भारती द्वारा निर्देशित एवं अणुव्रत समिति जयपुर द्वारा आयोजित “अणुव्रत काव्यधारा” कार्यक्रम अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
कार्यक्रम में अणुव्रत समिति एवं ज्ञानशाला के कार्यकारिणी सदस्यों द्वारा आकर्षक “अणुव्रत गीतिका” प्रस्तुत की गई। इसमें डॉ. जयश्री सिद्धा, कमलेश बरड़िया, नरेन्द्र चिंडलिया, गणपत भंडारी एवं ऋतु जैन की सहभागिता रही।
अणुविभा जीवन विज्ञान के क्षेत्रीय संयोजक उमेन्द्रजी गोयल ने अणुव्रत आचार संहिता का वाचन किया तथा जीवन विज्ञान के योगक्षेम वर्ष में आयोजित होने वाले शिविरों एवं तेरापंथी सभा में जीवन विज्ञान की गतिविधियों की जानकारी दी।
अणुव्रत समिति के अध्यक्ष विनोदजी बैद ने उपस्थित सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए अणुव्रत काव्यधारा कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रमा सिंह ने सभी अतिथियों का साफा एवं माल्यार्पण कर अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र गुप्ता, समन्वय अधिकारी, NSS शासन सचिवालय ने अपने उद्बोधन में कहा कि अणुव्रत नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है तथा युवाओं में चरित्र निर्माण की प्रेरणा देता है।
काव्यपाठ सत्र में विभिन्न कवियों ने अणुव्रत के सिद्धांतों एवं सामाजिक मूल्यों पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं।
🔹 शिल्पी पचौरी ने मानवीय एकता पर कविता प्रस्तुत करते हुए कहा —
ईश्वर ने बनाये हम सब इंसान एक से,
तो क्यों न देखे सबको केवल प्रेम से, “मन से मन का सेतु बने, प्रेम का दीप जलाएँ, जाति-पंथ के भेद मिटाकर मानवता अपनाएँ।”
🔹 डॉ. जयश्री सिद्धा ने “संकल्पपूर्वक वध नहीं करूँगा” विषय पर संवेदनशील कविता पाठ किया — “हर प्राणी में आत्मा का ही उजियारा होता है, अहिंसा से ही मानव जीवन प्यारा होता है।
🌿 संकल्पपूर्वक वध नहीं करूँगा 🌿
,“हर प्राणी में आत्मा का ही उजियारा है अहिंसा से ही मानव जीवन प्यारा है
अपने भीतर संवेदना जगाओ… किसी की पीड़ा को महसूस करो… क्योंकि अहिंसा व्रत नहीं, मानव आत्मा की सबसे सुंदर प्रार्थना है…””
🔹 फारूक अफरीदी साहब ने प्रामाणिकता पर प्रभावशाली पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं — “गीत : नाम मगर रह जाएगा
धन-दौलत सब मिट जाएगा…
सच्चे व्यवहारों का पौधा…
युगों-युगों फल जाएगा
झूठ वहीं रुक जाएगा…
सच आगे बढ़ जाएगा…
बच्चे घर में वही सीखते
जो व्यवहारों में होता है
सिर्फ़ किताबों से क्या होगा
यदि छल परिवारों में होता है ।
🔹 राधेश्याम भारती ने ब्रह्मचर्य साधना एवं संग्रह की सीमा निर्धारण पर कहा — “संयम से जीवन महके, मन में शांति समाए, सीमित संग्रह करने से मानव सुख को पाए।”
🔹 इकराम राजस्थानी ने सहिष्णुता, देशभक्ति एवं अणुव्रत पर ओजस्वी प्रस्तुति दी — “अणुव्रत का संदेश जगत में नई चेतना भरता है, यह एटम बम से भी बढ़कर मानवता को धरता है।”
🔹 कविता तनवानी ने सामाजिक कुरीतियों पर अपनी पंक्तियाँ प्रस्तुत कीं — “रूढ़ियों की जंजीरों को अब मिलकर तोड़ना होगा, नव समाज के सूरज को फिर से आगे बढ़ना होगा।”
🔹 मधु भट्ट तेलंग ने नैतिकता एवं व्यसनमुक्त जीवन पर कहा — “नैतिकता का दीप जले तो जीवन धन्य बन जाए, व्यसनमुक्त हर युवा बने तो भारत स्वर्ग कहलाए।”
विद्यालय की चार छात्राओं ने भी अपनी ओजस्वी कविताओं की प्रस्तुति देकर समां बाँध दिया। पूरे विद्यालय परिसर में प्रेरणा एवं उत्साह का वातावरण निर्मित हो गया।
कार्यक्रम में लगभग 600 विद्यार्थियों एवं 40 शिक्षिकाओं की उपस्थिति रही। साथ ही तेरापंथी सभा के अध्यक्ष शांतिलालजी गोलछा, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष रवि छाजेड़, तथा जयंत जी भूरा, जयपुर ज्ञानशाला की अध्यक्ष ऋतु जैन, अणुव्रत समिति के निवर्तमान अध्यक्ष विमल गोलछा सहित अणुव्रत समिति के अनेक कार्यकारिणी सदस्य कमलेश जी बरडिया, जी. एल शर्मा , मंगल चंद जी श्रीमाल, गणपत जी भंडारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संयोजन डॉ. जयश्री सिद्धा (मंत्री, अणुव्रत समिति) एवं नरेन्द्रजी चिंडलिया ने किया तथा मंच संचालन मोना भाटिया द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया। अंत में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रमा सिंह द्वारा सभी अतिथियों, कवियों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।

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