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जल संरक्षण बना जन-आंदोलन: सरभांग मुनि आश्रम में उमड़ा श्रमदान का जनसैलाब

मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद मझगवां द्वारा संचालित ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के द्वितीय चरण के अंतर्गत जल संरक्षण की एक अत्यंत प्रेरणादायक और ऐतिहासिक पहल सामने आई है। विकासखंड के सेक्टर क्रमांक 04 (अमीरिती पंचायत) स्थित पौराणिक सरभांग मुनि आश्रम में सैकड़ों लोगों ने एकजुट होकर श्रमदान किया और जल संरक्षण को जन-आंदोलन का स्वरूप दे दिया।अभियान के तहत प्राचीन जल स्रोतों के पुनरुद्धार और गिरते भू-जल स्तर को नियंत्रित करने के उद्देश्य से ऐतिहासिक कुंड की व्यापक सफाई की गई। इस दौरान कुंड से भारी मात्रा में गाद एवं प्लास्टिक कचरा निकाला गया। प्रस्फुटन समितियों, नवांकुर संस्थाओं, CMCLDP के विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों ने मिलकर सामूहिक श्रमदान किया और “विरासत की सफाई, भविष्य की सुरक्षा” का संदेश दिया।कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। घंटों तक चले इस श्रमदान से न केवल कुंड का स्वरूप निखर उठा, बल्कि समाज को यह भी संदेश मिला कि पारंपरिक जल स्रोत हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिनका संरक्षण हम सभी की जिम्मेदारी है।विकासखंड समन्वयक विजयेंद्र जाडिया ने इस अवसर पर कहा, “जल ही जीवन है। सरभांग मुनि आश्रम जैसे पवित्र स्थलों के जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखना केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व से जुड़ा कर्तव्य है।”यह अभियान अब महज़ एक सरकारी पहल न रहकर जन-भागीदारी से सशक्त जन-आंदोलन बन चुका है। इसमें विभिन्न संस्थाओं ने सक्रिय योगदान दिया, जिनमें जन अभियान परिषद, शिवा ग्रामीण विकास संस्थान (बृजेंद्र सिंह), बद्रीश सेवा संस्थान (राम प्रकाश त्रिपाठी), जय बिरसा मुंडा शोध समिति (राजेश त्रिपाठी), वसंत लाल सेवा संस्थान (गंगा कुशवाहा), नामदेव समाज सेवा संस्थान (रामकृष्ण नामदेव) सहित कई संगठनों की उल्लेखनीय भूमिका रही।इसके अतिरिक्त सोना सिंह, परामर्शदाता शिखा सिंह, रंगलाल मवासी, प्रभा दाहिया, अनुराग तिवारी, वेद मुनि त्रिपाठी, कैलाश सिंह बुंदेला, ठाकुर प्रसाद मिश्र, रवि कुमार विश्वकर्मा, शुभम त्रिपाठी, मंगल सिंह, नीरज सेन, समर बहादुर सिंह, रामचरित मिश्रा, स्मिता दाहिया, ध्रुव पांडेय, अरुण कुमार द्विवेदी एवं संदीप साकेत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।कार्यक्रम का समापन सामूहिक शपथ ग्रहण के साथ हुआ, जिसमें सभी उपस्थित लोगों ने जल स्रोतों को स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखने का संकल्प लिया।
यह पहल एक बार फिर साबित करती है कि जब समाज एकजुट होता है, तो जल संकट जैसी गंभीर चुनौतियों का समाधान भी संभव है।

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