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पद्मश्री आचार्य डॉ. चंदना जी के स्वर्गवास पर श्रद्धांजलि, ओम बांठिया ने जताया गहरा शोक

ब्यूरो चीफ सन्तोष कुमार गर्ग

 

भारत जैन महामंडल बालोतरा के अध्यक्ष ओम बांठिया ने पद्मश्री से सम्मानित आचार्य डॉ. चंदना जी साध्वी श्री के स्वर्गवास पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उन्होंने कहा कि आचार्य चंदना जी का जीवन आध्यात्मिक साधना, संयम और सेवा का अद्वितीय उदाहरण रहा है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।

ओम बांठिया ने बताया कि आचार्य चंदना जी ने मात्र 14 वर्ष की अल्प आयु में जैन दीक्षा अंगीकार कर आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत की थी। पूज्य उपाध्याय कवि रत्न श्री अमर मुनि जी महाराज के सानिध्य में उन्होंने साधना को आगे बढ़ाया और संयमी जीवन को अपना लक्ष्य बनाया। वर्ष 1987 में उपाध्याय श्री अमर मुनि द्वारा उन्हें आचार्य पद से विभूषित किया गया।

उन्होंने बताया कि वर्ष 1973 में बिहार के राजगीर में विरायतन विद्यापीठ संस्था के माध्यम से सेवा कार्यों की शुरुआत की गई। इस संस्था के जरिए विशेष रूप से नेत्र चिकित्सा, आंखों के ऑपरेशन, स्वास्थ्य सेवाएं और मानवता की सेवा के अनेक कार्यक्रम निरंतर संचालित होते रहे। साथ ही ध्यान और योग साधना के माध्यम से आध्यात्मिक जागरूकता का भी विस्तार किया गया।

ओम बांठिया ने कहा कि उन्हें भी दो बार राजगीर तीर्थ प्रवास के दौरान आचार्य चंदना जी के दर्शन एवं उनके साथ ज्ञान वार्ता का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि आचार्य चंदना जी को भारत सरकार द्वारा उनके उत्कृष्ट मानवीय सेवा कार्यों और निस्वार्थ समर्पण के लिए वर्ष 2022 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया गया था।

उन्होंने कहा कि आचार्य चंदना जी के स्वर्गवास से समाज को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके द्वारा किए गए सेवा कार्य और प्राणी मात्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेंगे।

अंत में भारत जैन महामंडल की ओर से ओम बांठिया ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति की मंगल कामना की।

Santosh Kumar Garg

Beauro Chief Balotra Rajasthan

Santosh Kumar Garg

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