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बीकानेर में “मिशन रोशनी” अभियान की शुरुआत, नशा मुक्त समाज बनाने का संकल्प

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर, 18 अप्रैल 2026।
समाज में बढ़ते नशे के अभिशाप को जड़ से खत्म करने और युवाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से एन.आर. असवाल चैरिटेबल संस्था एवं मनोचिकित्सक डॉ. सिद्धार्थ असवाल के संयुक्त तत्वावधान में “मिशन रोशनी” अभियान की शुरुआत की जा रही है। बीकानेर स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस जनहितकारी अभियान का औपचारिक ऐलान किया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि “मिशन रोशनी” केवल एक अभियान नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में एक मजबूत पहल है। इसका उद्देश्य उन लोगों को नशे के अंधकार से बाहर निकालना है, जो नशे की लत के कारण अपना जीवन, परिवार और भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। अभियान के तहत ऐसे लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने पर जोर दिया जाएगा।
बीकानेर में नशे की स्थिति चिंताजनक
अभियान से जुड़े आंकड़ों के अनुसार बीकानेर शहर में नशे की स्थिति बेहद गंभीर होती जा रही है। लगभग 8.7 लाख की शहरी आबादी में करीब 25.14% लोग किसी न किसी रूप में नशे का सेवन कर रहे हैं, यानी हर चौथा व्यक्ति नशे की चपेट में है।
नशे के प्रकारों में तंबाकू का प्रतिशत सबसे अधिक (67%) है, जबकि शराब (20%), अफीम (6.9%) और अन्य नशे भी तेजी से बढ़ रहे हैं। खास चिंता की बात यह है कि पिछले 10 वर्षों में 10 से 17 वर्ष के किशोरों में नशे की प्रवृत्ति 2% से बढ़कर 14% तक पहुंच गई है। वहीं कॉलेज जाने वाले लगभग 29.5% युवा भी किसी न किसी नशे की गिरफ्त में हैं।
नशे के कारण और दुष्परिणाम
विशेषज्ञों के अनुसार जागरूकता की कमी और नशे की आसान उपलब्धता इसके मुख्य कारण हैं। नशे के कारण समाज में अपराध जैसे चोरी, लूट, चेन स्नेचिंग, बलात्कार और हत्या जैसी घटनाओं में वृद्धि होती है। इसके अलावा मानसिक रोग और आत्महत्या के मामलों में भी नशे की बड़ी भूमिका सामने आई है।
मिशन रोशनी के तीन मुख्य स्तंभ
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए तीन प्रमुख रणनीतियों पर काम किया जाएगा—
रोकथाम (Preventive Approach): जागरूकता फैलाना
पहचान (Diagnostic Approach): नशे की पहचान और जांच
उपचार (Therapeutic Approach): इलाज और काउंसलिंग
कार्य योजना
अभियान के तहत हर महीने स्कूल, कॉलेज और सार्वजनिक स्थानों पर कम से कम चार जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पुलिस, प्रशासन, समाज कल्याण, चिकित्सा और शिक्षा विभाग के साथ मिलकर अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा।
इसके साथ ही युवाओं को जोड़कर “यूथ क्लब” बनाए जाएंगे और मोहल्लों में “रोशनी वॉलंटियर्स” तैयार किए जाएंगे, जो नशा मुक्ति अभियान को घर-घर तक पहुंचाएंगे।
निःशुल्क नशा मुक्ति शिविर
हर महीने की 7 तारीख को निःशुल्क नशा मुक्ति शिविर आयोजित किया जाएगा, जिसमें जरूरतमंद लोगों को मुफ्त परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। मनोचिकित्सकों द्वारा काउंसलिंग कर नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
समाज से सहयोग की अपील
डॉ. सिद्धार्थ असवाल ने कहा कि यह अभियान तभी सफल होगा जब समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिलेगा। उन्होंने अपील की कि “मिशन रोशनी” को जन-जन तक पहुंचाने में सभी लोग आगे आएं, ताकि बीकानेर को नशा मुक्त बनाया जा सके।
“अंधेरों से लड़कर अब उजाला लाना है,
भटके हुए हर राही को राह दिखाना है,
नशा मिटाकर उम्मीदों का दीप जलाना है,
मिशन रोशनी को अब घर-घर पहुंचाना है।”

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