देशब्रेकिंग न्यूज़राजनीति

दोस्ती, कर्तव्य और अंतिम इच्छा—पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की वो आखिरी कहानी

राजस्थान हेड डॉ राम दयाल भाटी

 

राजधानी के Apollo Hospital में एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने भारतीय राजनीति में मानवीय रिश्तों की गहराई को हमेशा के लिए अमर कर दिया। यह कहानी है देश के पूर्व प्रधानमंत्री Chandra Shekhar की—एक ऐसे नेता की, जिनकी पहचान केवल पदों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व, स्पष्टवादिता और रिश्तों की सच्चाई से होती थी।

चंद्रशेखर, जिन्हें राजनीति में “युवा तुर्क” के नाम से जाना जाता था, अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले नेता थे। उनकी बेबाकी से कभी-कभी Indira Gandhi जैसी मजबूत नेता भी असहज हो जाती थीं।

करीब 2005 में उन्हें कैंसर ने अपनी चपेट में ले लिया। डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए अमेरिका जाने की सलाह दी, लेकिन देश की मिट्टी से जुड़े चंद्रशेखर ने पहले इसे ठुकरा दिया। बाद में करीबी लोगों के समझाने पर वे इलाज के लिए तैयार हुए। इलाज के दौरान कुछ सुधार भी देखने को मिला, जिससे उम्मीद जगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

अंतिम इच्छा भी निभाने की जिद

जून 2007 तक उनकी हालत लगातार बिगड़ने लगी। इसी बीच उन्होंने डॉक्टरों से एक भावुक आग्रह किया—

“किसी तरह 19 जुलाई तक बचा लीजिए… मुझे भैरोंसिंह को वोट देना है।”

यह 19 जुलाई वही दिन था, जब राष्ट्रपति चुनाव होना था और उनके करीबी मित्र Bhairon Singh Shekhawat मैदान में थे। यह उनकी दोस्ती और कर्तव्यनिष्ठा का सबसे बड़ा उदाहरण था।

7 जुलाई की रात—जब थम गया एक युग

7 जुलाई 2007 की रात अचानक उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखने का निर्णय लिया। खबर मिलते ही उनके करीबी और परिजन अस्पताल पहुँच गए।

अगली सुबह ICU के बाहर सन्नाटा था और अंदर जिंदगी की आखिरी जंग चल रही थी। डॉक्टर पूरी कोशिश में जुटे थे, मशीनें अपनी सीमा तक काम कर रही थीं। उसी बीच उनके करीबी साथी भी उनके पास मौजूद थे, जो परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे थे।

कुछ ही देर बाद वह क्षण आया, जब चंद्रशेखर ने अंतिम सांस ली। ऐसा प्रतीत हुआ मानो वे किसी अपने के आने का इंतजार कर रहे थे—और जैसे ही वह इंतजार पूरा हुआ, उन्होंने चुपचाप इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

इंसानियत की मिसाल बन गया वह दिन

उस दिन Apollo Hospital सिर्फ एक अस्पताल नहीं रहा, बल्कि दोस्ती, राजनीति और इंसानियत के सबसे सच्चे रिश्तों का गवाह बन गया।

यह कहानी सिर्फ एक नेता के जीवन का अंत नहीं, बल्कि उस दौर की याद दिलाती है जब राजनीति में रिश्तों, वादों और मानवीय मूल्यों की अहमियत सबसे ऊपर होती थी।

निष्कर्ष

कुछ कहानियाँ इतिहास की किताबों में नहीं, लोगों के दिलों में लिखी जाती हैं। चंद्रशेखर की यह आखिरी कहानी भी उन्हीं में से एक है—जहां एक नेता ने अपने अंतिम समय में भी दोस्ती और कर्तव्य को सबसे ऊपर रखा।

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

Dr Ram Dayal Bhati

Editor Rajasthan Mobile Number 97848 14914

Related Articles

Back to top button