अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन को मजबूत और प्रभावी बनाने के लिए पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी बेहद आवश्यक बताई गई है। संगठन से जुड़े वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि जब तक पदाधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन नहीं करेंगे और संगठन का प्रचार-प्रसार नहीं करेंगे, तब तक संगठन का विस्तार संभव नहीं है।
संगठन की मजबूती के लिए कई अहम बिंदुओं पर जोर दिया गया। बताया गया कि केवल नाम मात्र के पदाधिकारी होने से काम नहीं चलेगा, बल्कि समय-समय पर बैठक आयोजित कर सभी की जिम्मेदारियां तय करनी होंगी। इसके साथ ही हर पदाधिकारी को अपने-अपने क्षेत्र में पोस्टर, पम्पलेट, सोशल मीडिया और समाचार पत्रों के माध्यम से संगठन की जानकारी जन-जन तक पहुंचानी होगी।
जनसंपर्क अभियान को भी संगठन के विस्तार का मुख्य आधार बताया गया। गांव, वार्ड, ब्लॉक और तहसील स्तर पर लोगों से सीधे संपर्क कर नए सदस्यों को जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मानवाधिकार से जुड़े मामलों को प्रमुखता से उठाकर पीड़ितों की मदद करने से संगठन की विश्वसनीयता बढ़ेगी और समाज में सकारात्मक पहचान बनेगी।
नियमित बैठक और रिपोर्टिंग व्यवस्था को भी जरूरी बताया गया। हर महीने जिला स्तर पर बैठक कर पदाधिकारियों से उनके कार्यों की रिपोर्ट ली जाए और जो सदस्य कमजोर प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें सुधार के लिए मार्गदर्शन दिया जाए।
इसके अलावा संगठन में अनुशासन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। निष्क्रिय पदाधिकारियों को पहले नोटिस दिया जाए और सुधार नहीं होने पर उन्हें पद से हटाने की कार्रवाई की जाए, ताकि अन्य सदस्यों में जिम्मेदारी का भाव बना रहे।
निष्कर्ष:
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक संगठन के पदाधिकारी सक्रिय होकर प्रचार-प्रसार और जनहित के कार्य नहीं करेंगे, तब तक आम जनता को संगठन के उद्देश्यों की जानकारी नहीं मिल पाएगी और संगठन मजबूत नहीं बन सकेगा।