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भिवाड़ी की हवा में जहर, कार्रवाई में ढिलाई — नवंबर से दिसंबर तक AQI 400 के आसपास, जुर्माने लाखों में… पर हालात जस के तस

ब्यूरो चीफ मुकेश कुमार शर्मा
भिवाड़ी, 2 दिसंबर।
भिवाड़ी में नवंबर से लेकर दिसंबर के शुरुआती दिनों तक हवा की हालत लगातार गिरती रही और AQI पूरे महीने 300–400 की खतरनाक रेंज में झूलता रहा। 2 नवंबर को PM2.5 का स्तर 402 तक पहुंच गया—जो किसी भी औद्योगिक शहर में आपात स्थिति मानी जाती है। दिसंबर की शुरुआत भी राहत नहीं लाई; 1 दिसंबर को PM2.5 स्तर 302 दर्ज हुआ। लगातार 30 दिनों से अधिक समय तक “बहुत खराब” हवा में सांस लेना यहां के लाखों लोगों को बीमार कर रहा है।
इस बीच GRAP नियमों के उल्लंघन पर जिला प्रशासन ने कई संयुक्त कार्रवाइयाँ कीं, लेकिन आंकड़ों से साफ दिखता है कि जमीन पर सख्ती अभी भी नाकाफी है। 27 नवंबर से 1 दिसंबर तक कुल 9,82,700 रुपये के जुर्माने लगाए गए—लेकिन हवा में सुधार नाम मात्र का दिखा।
27 नवंबर को विभिन्न विभागों ने 352 निरीक्षण कर 86 उल्लंघनों पर 4,63,000 रुपये का जुर्माना लगाया। C&D गतिविधियों में 82 चालान हुए, कचरा जलाने और अवैध डंपिंग पर भी कार्रवाई हुई।
28 नवंबर को 179 निरीक्षणों में 61 उल्लंघन मिले और 3,31,100 रुपये का दंड वसूला गया, जिनमें 59 चालान सिर्फ C&D साइटों पर किए गए।
29 नवंबर को 116 निरीक्षणों में 25 उल्लंघन सामने आए और 1,32,800 रुपये का जुर्माना लगाया।
30 नवंबर को 52 निरीक्षणों में 6 उल्लंघनों पर 23,600 रुपये का चालान किया गया।
1 दिसंबर को 32 निरीक्षणों में 5 उल्लंघनों पर 38,200 रुपये का दंड लगाया गया।
औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षणों में कई बार मानकों का पालन न करने पर डीजी सेट सील किए गए, कुछ मामलों को मुख्यालय भेजा गया और कई इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण उपकरण ठीक से काम करते नहीं मिले। परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस ने पांच दिनों में 65 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की।
सड़क धूल नियंत्रण के लिए 27 से 1 दिसंबर तक रोजाना औसतन 20–28 वॉटर टैंकर, 4 MRSM मशीनें और दर्जनों किमी सड़क सफाई की गई, लेकिन इन प्रयासों के बावजूद AQI में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ—जो बताता है कि प्रदूषण का असल स्रोत अभी भी खुला घूम रहा है।
स्थानीय अस्पतालों में सांस, एलर्जी और हार्ट संबंधी रोगियों की संख्या नवंबर में तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञ चेतावनी दे चुके हैं कि यदि 300–400 AQI का स्तर लगातार बना रहा तो बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर दीर्घकालिक और खतरनाक होगा।
यह संयुक्त रिपोर्ट सिर्फ आंकड़े नहीं—यह जिला कलेक्टर, RIICO, RSPCB और नगर परिषद को दिखाया जाने वाला एक साफ़ आईना है।
भिवाड़ी अब मोड़ पर खड़ा है—या तो प्रशासन निर्णायक सख्ती दिखाए, या हवा आने वाले महीनों में इस औद्योगिक शहर को बीमार कर देगी।
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