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सरकार के इंतज़ार में मत बैठिए… क्या पता सरकार आपके भरोसे बैठी हो…!

*सरकार के इंतज़ार में मत बैठिए… क्या पता सरकार आपके भरोसे बैठी हो…!*
भिवाड़ी, राजस्थान –जी हाँ दोस्तों, यह कोई फिल्मी डायलॉग नहीं, बल्कि सच्ची घटना है। राजस्थान के औद्योगिक नगर भिवाड़ी में रहने वाले एक साधारण व्यापारी, मूलतः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर से ताल्लुक रखने वाले श्रीमान संजय त्रिपाठी ने जो कदम उठाया है, उसने सभी को अचंभित कर दिया।
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बेबाकी से कहा –
> “अगर आप Google करें और लिखें ‘दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर’ तो पहले नंबर पर भिवाड़ी का नाम आता है। यह गर्व नहीं, बल्कि शर्म का विषय है… हमें लज्जित होना चाहिए।”
भिवाड़ी – राजस्व देता है, बदले में उपेक्षा पाता है
त्रिपाठी जी बताते हैं कि भिवाड़ी, राजस्थान सरकार को सर्वाधिक राजस्व देने वाला शहर है। इसके बावजूद, पिछले दो दशकों से शहर के बुनियादी हालात जस के तस हैं।
टूटी सड़कें,
जलभराव से डूबा मुख्य प्रवेश द्वार,
प्रदूषण का अंबार,
और पलायन को मजबूर व्यापारी।
राजस्थान, हरियाणा और केंद्र – तीनों जगह भाजपा सरकार होने के बाद भी भिवाड़ी-दरुहेरा का जलनिकासी विवाद नहीं सुलझ सका।
एक साधारण नागरिक ने किया असाधारण काम
सरकार और विभागों के कानों पर जूँ तक न रेंगी, तो संजय त्रिपाठी ने ‘BADE BHAI HELPING FOUNDATION’ नामक NGO बनाकर खुद कमान संभाली।
👉 बिना किसी सरकारी सहयोग के, अपने निजी पैसों से उन्होंने सड़कों की मरम्मत करवाई, गंदगी साफ करवाई और लोगों को जगाने का काम किया।
उनकी इस पहल ने धीरे-धीरे असर दिखाना शुरू किया और विभागों ने काम पर ध्यान देना शुरू किया।
“मैं सरकार का विकल्प नहीं… बस एक जिम्मेदार नागरिक हूँ”
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे सरकार का विकल्प बनने की कोशिश कर रहे हैं? तो त्रिपाठी जी मुस्कुराते हुए बोले –
> “नहीं… मैं न तो सरकार का विकल्प बनने लायक हूँ और न ही मेरी ऐसी इच्छा है।
मैं तो बस इस देश का एक साधारण नागरिक हूँ, और मेरा भी कर्तव्य है भारत माँ की सेवा करना।”
न्होंने आगे कहा –
> “हमारे संविधान के अनुच्छेद 51(A) में 11 मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) बताए गए हैं।
उन्हीं में से एक है ‘राष्ट्र की संपत्ति की रक्षा करना।’
मैं वही कर्तव्य निभा रहा हूँ।”
मांझी की याद दिलाती जज़्बे की कहानी
त्रिपाठी जी की यह जिद और जज़्बा हमें ‘मांझी – द माउंटेन मैन’ की याद दिलाता है।
जिस तरह दशरथ मांझी ने पहाड़ काटकर रास्ता बनाया और कहा था –
“जहाँ चाह, वहाँ राह।”
उसी तरह संजय त्रिपाठी ने भी बिना सरकार के इंतज़ार किए पहल की और यह साबित कर दिया कि –
“सरकार के इंतज़ार में मत बैठिए… क्या पता सरकार आपके भरोसे बैठी हो!”
ट्वीट से सत्ता को जगाने की कोशिश
त्रिपाठी जी ने बालक नाथ, भूपेंद्र सिंह, नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री राजस्थान तक ट्वीट करके सत्ता का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
उनकी मुहिम का मकसद सिर्फ इतना है कि –
“सत्ता और विभाग तनीक शर्म करें… और अपने कर्तव्य निभाने के लिए जागें।”
✍️ निष्कर्ष
भिवाड़ी की सड़कों पर खड़े होकर एक साधारण व्यापारी ने जो असाधारण साहस दिखाया, वह समाज के लिए प्रेरणा है।
👉 यह कहानी सिर्फ भिवाड़ी की नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक आईना है –
“अधिकार सब जानते हैं… पर कर्तव्य कोई नहीं निभाता। अगर हर नागरिक अपना कर्तव्य निभाए, तो देश बदलते देर नहीं लगेगी।”

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