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महिलाओं को अपने खुद के नाम की पहचान स्वयं बनानी चाहिए. शर्मा
बीकानेर से डॉ राम दयाल भाटी
बीकानेर फ़ोर्ट स्कूल की प्राचार्य पिंकी शर्मा का कहना है कि पहचान चाहे छोटी ही क्यों ना हो लेकिन पहचान स्वयं की होनी चाहिए ।
महिलाओं को अपने नाम की पहचान स्वयं बनानी चाहिए ना की किसी और के नाम से उसकी पहचान हो ।
बीकानेर में पिंकी शर्मा प्राचार्य एवं सरस फाउंडेशन चेयरमैन से हमारी मुलाकात हुई पिंकी शर्मा ने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा का परिचय संपूर्ण समाज को अपने कार्य के द्वारा दे दिया था ।
बीकानेर के पास नोखा मंडी में मात्र साढ़े तेरह साल की उम्र में सर्वप्रथम प्रियदर्शन हॉबी सेंटर नाम से कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना की । बचपन से ही विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए महिलाओं के आत्म सम्मान में एक नई पहचान बनाने की लगन में निरंतर आगे बढ़ती रही तथा महिलाओं और बच्चियों को स्वावलंबी बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी एवं समाज को एक नई दिशा प्रदान की ।
आपने हाथ का हुनर हो या घर का सारा काम और तो और शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई भी काम हो पिंकी ने कभी हिम्मत नहीं हारी धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाते हुए आगे बढ़ती रही और एक ऐसा मुकाम खड़ा कर दिया जहां आज चारों तरफ सभी के मुंह से यही सुनने को मिलता है कि वाह क्या बात है ।
कहीं भी समाज हित में कोई भी प्रोग्राम हो पिंकी शर्मा वहां आपको हमेशा उनके साथ खड़ी मिलेगी ।2008 में शिक्षा के क्षेत्र में थर्ड ग्रेड शिक्षिका के रूप में प्रवेश किया और कड़ी मेहनत और लगन के द्वारा आज प्राचार्य का पद सुशोभित होने के बाद भी पिंकी शर्मा सक्रिय रूप से सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी हुई है और विभिन्न प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम करवाती रहती है ।
शर्मा को शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अनेक प्रकार संस्थाओं और प्रशासन के द्वारा जिला स्तरीय , राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय स्तरीय सम्मान से सम्मानित किया गया तथा आज भी यह सफर निरन्तर जारी है । शिक्षा हो या समाज सेवा वह आज भी अपने कार्य में हर तरह से परिपूर्ण है ।
शर्मा ने शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण , रोजगार , स्किल डेवलपमेंट तथा जागरूकता तथा अन्य क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के गतिविधियों का आयोजन करवाया जाता हैं । बच्चों को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आज भी अपनी नौकरी के साथ-साथ उनके साथ भी खड़ी है चाहे स्काउट का काम हो चाहे शिक्षक का काम हो या चाहे महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने काम हो पूरी कर्तव्य निष्ठा के साथ समाज को एक नई दिशा की ओर अग्रसर करने हेतु हमेशा अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका निभाती है ।

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